बस्ती, उत्तर प्रदेश – भाजपा के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर नगरपालिका परिषद बस्ती में अमृत योजना के तहत करोड़ों रुपए के बंदरबांट का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पत्र का विवरण:
विधायक जायसवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अमृत योजना के तहत नगरपालिका बस्ती के 25 वार्डों में घर-घर जल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 40 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस कार्य की जिम्मेदारी जल निगम को सौंपी गई थी, और इसे जलकल के जेई अर्चना की देखरेख में किया जाना था। हालांकि, अर्चना के प्रसूति अवकाश पर जाने के बाद, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी कमलेश और जल निगम के एई ने जलकल के जेई का प्रभार जल निगम के जेई राहुल को दे दिया।
आरोप:
विधायक ने आरोप लगाया कि जल निगम के जेई राहुल सिंह, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी कमलेश और नगरपालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने बिना जांच कराए आधे-अधूरे और गुणवत्ता विहीन काम कराकर पूरे पैसे का बंदरबांट कर लिया।
निरीक्षण और रिपोर्ट:
जलकल के जेई अर्चना के अवकाश से लौटने पर, उन्होंने इस कार्य का निरीक्षण किया और कई अनियमितताएं पाईं। उन्होंने इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को दी, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, विधायक ने आरोप लगाया कि शासनादेश के खिलाफ जाकर तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ने जल निगम के जेई राहुल को जिले भर के सभी नगर पंचायतों के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्यों का प्रभार दे दिया।
विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जलकल के जेई अर्चना की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।

