अयोध्या, उत्तर प्रदेश – अयोध्या के पूराकलंदर इलाके में 12 साल की बच्ची से गैंगरेप की घटना ने राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है। बच्ची के गर्भवती होने के बाद यह मामला प्रकाश में आया। इस केस में मोईद खान समेत कुछ अन्य लोगों पर आरोप लगे हैं। मोईद खान का नाता समाजवादी पार्टी से बताया जा रहा है। इस घटना पर सियासत चरम पर है, जहां भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में सख्त कार्रवाई की है। भदरसा पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही रोहित यादव को सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले एसएचओ और पुलिस चौकी इंचार्ज को भी सस्पेंड किया जा चुका है। पीड़िता के घर भाजपा का डेलीगेशन भी पहुंचा है, जिससे मामला और गरमा गया है।
समाजवादी पार्टी का रुख:
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कहा, “अगर सच में बलात्कार हुआ है तो उन्हें फांसी होनी चाहिए लेकिन बार-बार समाजवादी पार्टी का नेता और मुसलमान होना दिखाना गलत है। यह हमारी पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। भाजपा नेता आरोपी होते हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?”
अफजाल अंसारी ने कहा, “अगर मोईद खान पर लगा जुर्म साबित हो गया तो हम धक्के मार कर निकाल देंगे, लेकिन बिना सबूत के कार्रवाई करना गलत है। अपराधी कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
भाजपा और अन्य नेताओं का जवाब:
भाजपा नेता हरि सहनी ने कहा, “योगी सरकार ने बुलडोजर से आरोपी की बेकरी ही नहीं तोड़ी बल्कि उसकी हेकड़ी भी तोड़ी है। अखिलेश यादव रेप के आरोपी को बचाने में लगे हैं, यह शर्मनाक है।”
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और ‘टुकड़े टुकड़े’ गैंग के सभी नेता इस मामले पर चुप हैं, क्योंकि आरोपी मुस्लिम है। जब सनातन के खिलाफ बोलने का मौका आता है, तो वे सभी एकजुट हो जाते हैं।”
बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा, “डीएनए टेस्ट की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पीड़िता अस्पताल में भर्ती है और बयान दे रही है। अगर समाजवादी पार्टी यह बात कह रही है, तो यह आरोपियों को बचाने की साजिश है।”
सरकारी और सियासी दृष्टिकोण:
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “लोग समाजवादी पार्टी की सरकार को गुंडों की सरकार कहते थे, जैसे लोग एनडीए सरकार को बुलडोजर सरकार कहते हैं। इस सरकार से अपराधी डरते हैं, समाजवादी पार्टी की सरकार में अपराधी खुले सांड की तरह घूमते थे।”
इस घटना ने राज्य की राजनीतिक परिदृश्य को गरमा दिया है, जहां एक तरफ भाजपा सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने नेताओं के बचाव में खड़ी है। आरोप-प्रत्यारोप की इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पीड़िता को न्याय कैसे मिलेगा और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

