लखनऊ। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के बैनर तले मंगलवार को राजधानी में छात्रों ने परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर ‘रोहित एक्ट’ और यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 लागू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा।
मार्च में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे छात्र मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। SFI के राज्य सचिव अब्दुल वहाब ने राजकोट एम्स में छात्र रतन मेघवाल की मौत को “संस्थागत हत्या” बताते हुए कहा कि भेदभाव और प्रशासनिक उदासीनता ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है।

संगठन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा’ संबंधी विनियम, 2026 पर न्यायालय की रोक चिंताजनक है।
जिला संयोजक अंकित गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित यूजीसी विनियम जाति, लिंग, धर्म, दिव्यांगता और आर्थिक आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने की दिशा में अहम कदम था, लेकिन इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका। वहीं, छात्रों ने अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और गैर-अधिसूचित जनजातियों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति बजट के पूर्ण उपयोग और न्यायसंगत वितरण की भी मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मांग की कि विश्वविद्यालयों में भेदभाव से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र वैधानिक समिति गठित की जाए, दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो, तथा एक राष्ट्रीय निगरानी आयोग बनाया जाए। साथ ही, छात्रवृत्ति फंड के समुचित उपयोग को सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई।
SFI लखनऊ संयोजन समिति ने घोषणा की कि 18 मार्च को प्रदेश के सात अन्य जिलों—कासगंज, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, कानपुर, गौतम बुद्ध नगर, अमेठी और कुशीनगर—में भी इसी मुद्दे को लेकर पैदल मार्च और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

