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रवई की सफाई में अनियमितता का आरोप, किसानों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

बस्ती, 11 मार्च।

जनपद के गौर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पढ़नी के किसानों ने सरयू नहर खण्ड-4 बस्ती के अंतर्गत आने वाले रवई नाले की सफाई में गंभीर अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। किसानों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम पढ़नी, पोस्ट बेलघाट के किसानों का कहना है कि गांव के समीप बहने वाले रवई नाले की नियमित एवं मानक के अनुरूप सफाई कराना सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकांश मामलों में सफाई कार्य केवल कागजों में ही दिखाया जाता है। किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से केवल पुल और पुलियों के आसपास लगभग 100 से 200 मीटर तक ही औपचारिक सफाई कराई जाती है, जबकि कागजी अभिलेखों में पूरे नाले की सफाई दर्शा दी जाती है।

किसानों के अनुसार नाले के शेष हिस्सों में पेड़-पौधे, झाड़-झंखाड़ और गाद जमी रहती है, जिससे नाले का प्रवाह बाधित होता है। ऐसे में जब नहर का पानी छोड़ा जाता है तो वह आगे बढ़ने के बजाय आसपास बने कट के माध्यम से किसानों के खेतों में फैल जाता है, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई जगह जलभराव के कारण कृषि भूमि अनुपयोगी भी हो रही है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार अवर अभियंता और सहायक अभियंता से शिकायत की गई, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। साथ ही सफाई कार्य में लगाई जाने वाली मशीनों द्वारा भी नाले की वास्तविक दिशा और प्रवाह का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही रवई नाले की पूरी लंबाई में पारदर्शी तरीके से सफाई कराई जाए, ताकि किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो क्षेत्र के किसान जिलाधिकारी कार्यालय या मुख्यमंत्री आवास के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। साथ ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित अभिलेख प्राप्त कर लोकायुक्त, सतर्कता विभाग और मीडिया के समक्ष भी मामला उठाया जाएगा।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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