Homeप्रदेशउत्तर प्रदेश: बहराइच हिंसा मामले में मौत की सज़ा पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश: बहराइच हिंसा मामले में मौत की सज़ा पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश के बहराइच में अक्तूबर 2024 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के एक मामले में सेशन कोर्ट के फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। अदालत ने मुख्य अभियुक्त सरफ़राज़ को फांसी की सज़ा सुनाई है, जबकि नौ अन्य अभियुक्तों को उम्रक़ैद और सबूतों के अभाव में तीन अभियुक्तों को बरी कर दिया गया है।

11 दिसंबर को सुनाए गए फैसले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पवन कुमार शर्मा ने कहा कि अभियोजन पक्ष मुख्य अभियुक्त के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा। हालांकि, इस फैसले के बाद मृत्युदंड की उपयुक्तता और मामले की परिस्थितियों को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।

यह हिंसा 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान महसी तहसील के महराजगंज इलाके में भड़की थी। घटना के दौरान राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि राम गोपाल मिश्रा एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के घर की छत पर चढ़कर झंडा बदलने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद विवाद बढ़ा और हिंसा में तब्दील हो गया।

मामले में अदालत के सख्त रुख को कुछ लोग कानून व्यवस्था के लिए ज़रूरी बता रहे हैं, वहीं कई कानूनी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता मृत्युदंड के विकल्पों और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की संभावना भी जताई जा रही है।

Vedic Dwivedi
Vedic Dwivedi
Founder Member & Chief Editor of NTF
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