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जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता: सत्यभान सिंह जनवादी

अयोध्या 14नवंबर।

नन्द कांवेंट स्कूल द्वारा आज विद्यालय पर बाल दिवस स्कूल के प्रबंधक रजनीकांत के नेतृत्व में व विद्यालय की मैनेजर की संयोजन में बड़ी धूम धाम से मनाया गया उनको नमन करते हुए मनाया गया।

और बाल मेला का भी आयोजन किया गया। बाल मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि शहीद भगतसिंह स्मृति ट्रस्ट के चेयरमैन ससत्यभान सिंह जनवादी ने फीता काटकर किया। स्कूल के ही बच्चों ने सभी प्रकार का खाने वाले अच्छा स्टाल लगाया जिसमें सभी लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भरपूर आनंद लिया।साथ ही साथ बच्चों को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के चेयरमैन सत्यभान सिंह जनवादी ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू चाचा नेहरू के नाम से जाने जाते थे।भारत के पहले प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले महान राष्ट्रनिर्माता थे। 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्मे नेहरू का प्रारंभिक जीवन आधुनिक शिक्षा, उदार विचारों और राष्ट्रीय भावना से प्रभावित रहा। इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त कर वे भारत लौटे और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलनों में उनकी भूमिका निर्णायक रही। वे युवाओं के प्रेरणास्रोत बने और “भारत माता की जय” के साथ उनकी वाणी हमेशा जोश भरती थी।

मालती तिवारी ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू ने देश को वैज्ञानिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक आधार देने का कार्य किया। उनका विश्वास था कि आधुनिकता तभी आएगी जब विज्ञान, तकनीक और शिक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाए। इसी दृष्टि से उन्होंने भाखड़ा-नांगल, हिराकुंड जैसी बहुउद्देशीय परियोजनाओं, इसरो, आईआईटी, वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थाओं और बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया।नेहरू की विदेश नीति “गुटनिरपेक्षता” के सिद्धांत पर आधारित थी। वे विश्व शांति के प्रबल समर्थक थे और मानते थे कि राष्ट्रों को टकराव के बजाय संवाद और सहयोग की राह अपनानी चाहिए। उनकी यह सोच उन्हें विश्व राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल करती है।

स्कूल के प्रबंधक रजनीकांत ने कहा कि व्यक्तित्व की दृष्टि से नेहरू संवेदनशील, मानवीय और बच्चों से अत्यधिक प्रेम करने वाले नेता थे। इसी कारण उनका जन्मदिन ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उनकी लेखनकला भी अद्वितीय थी; द डिस्कवरी ऑफ इंडिया, ग्लिम्प्सेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री और एन ऑटोबायोग्राफी जैसी कृतियाँ आज भी अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

स्कूल की प्रधानाध्यापिका नीतू द्विवेदी ने कहा कि 27 मई 1964 को नेहरू का निधन हुआ, परंतु उनके द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भारत को आधुनिक राष्ट्र बनाने के संकल्प ने उन्हें सदैव के लिए इतिहास में अमर कर दिया। वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी विचारक थे जिन्होंने भारत को अपनी ही सामर्थ्य पर विश्वास करना सिखाया।

कार्यक्रम में रीना शर्मा,शिवांगी नंदा,शैलेन्द्र कुमार,पंकज कुमार,सहित दर्जनों अध्यापक बच्चे और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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