नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गांधी जी के आदर्श और शास्त्री जी का जीवन दर्शन न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गांधी जयंती, बापू के असाधारण जीवन को नमन करने का दिन है। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा और करुणा पर आधारित गांधी जी का मार्ग आज भी वैश्विक शांति और मानवता के कल्याण का सबसे प्रभावी साधन है। मोदी ने कहा कि गांधी जी ने जिस आत्मनिर्भर और स्वदेशी भारत की परिकल्पना की थी, वही आज “विकसित भारत” के रूप में साकार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसी तरह लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें एक असाधारण राजनेता और सच्चा जननेता बताया। मोदी ने लिखा कि शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प ने भारत को मजबूती दी। उनका नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजता है और देश को आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्री जी का नेतृत्व कठिन समय में भी देश को एकजुट करने वाला था।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अपील की कि वे गांधी जी की जयंती पर स्वदेश निर्मित वस्तुओं का उपयोग करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाएँ। उन्होंने कहा कि यही बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मोदी ने यह भी जोड़ा कि आज के समय में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संकट और हिंसा जैसी चुनौतियों से निपटने में गांधी जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के नेताओं ने भी गांधी और शास्त्री जी को उनकी जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी संदेश जारी कर कहा कि गांधी जी की शिक्षाएँ भारतीय लोकतंत्र की नींव हैं, वहीं शास्त्री जी की सादगी और ईमानदारी आज भी राजनीति में एक आदर्श बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि 2 अक्तूबर का दिन देश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। एक ओर महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को आज़ादी दिलाई, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री रहते हुए अपने संकल्प और नीतियों से भारत को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया। गांधी जी का स्वदेशी आंदोलन आज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति के रूप में जीवंत है।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि गांधी और शास्त्री जैसे महापुरुषों का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज भी उनकी सीख और प्रेरणा भारत के भविष्य को गढ़ने में मार्गदर्शन कर रही है।


