बस्ती।
राष्ट्रवाद, सेवा और गौरक्षा के प्रतीक स्वर्गीय विष्णु दत्त ओझा की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को बस्ती जनपद में “विष्णु दत्त ओझा रक्तदान एवं सेवा संस्थान समिति” द्वारा 14वां वार्षिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर पूर्वांचल का सबसे बड़ा रक्तदान शिविर माना जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में ओझा जी के अनुयायियों, समर्थकों और समाजसेवियों ने भाग लेकर रक्तदान किया।
शिविर में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। सभी ने स्व. ओझा जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके कार्यों और विचारों को याद किया।
इस अवसर पर स्व. ओझा जी के छोटे भाई नंदीश्वर ओझा ने भावुक होते हुए कहा, “जब हृदय के पवित्र भाव से कोई कार्य किया जाता है, तब वह कार्य निश्चित रूप से सफल होता है। रक्तदान उन लोगों के जीवन को बचाने का माध्यम है जो रक्त की कमी से जूझ रहे होते हैं। यह कार्य यदि शुद्ध अंतःकरण से किया जाए, तो कोई भी बाधा राह में नहीं आती।”
उन्होंने आगे कहा कि स्व. विष्णु दत्त ओझा ने राष्ट्रवाद, हिन्दुत्व, गौरक्षा और सेवा जैसे मूल्यों को समाज में दृढ़ता से स्थापित किया। उनकी यादें आज भी जनमानस में जीवित हैं और यह शिविर उसी की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।

कार्यक्रम में पहुँचे अयोध्या के प्रसिद्ध हिंदूवादी नेता व हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने भी स्व. ओझा जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “स्व. ओझा जी ने समाज और राष्ट्र के लिए अपनी आहुति दी। वे एक विचार थे, जो आज भी हमारे बीच जीवित हैं। उनकी प्रेरणा से नई पीढ़ी समाज सेवा और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभा रही है।”
शिविर के आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज किसी सच्चे विचार और उद्देश्य से जुड़ता है, तो परिणाम ऐतिहासिक बनते हैं। स्व. विष्णु दत्त ओझा की स्मृति में आयोजित यह रक्तदान शिविर न केवल सेवा का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रप्रेम का संदेश भी प्रसारित किया।

