11 जुलाई 2025: आज से भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण माह (सावन) का शुभारंभ हो गया है। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंज रहे हैं और शिवालयों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। यह माह शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसमें विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं का पालन किया जाता है। इस वर्ष श्रावण माह 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा, जिसमें चार सावन सोमवार पड़ेंगे।
श्रावण माह की मान्यताएं और धार्मिक महत्व
श्रावण माह को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार–
समुद्र मंथन और हलाहल विष: ऐसी मान्यता है कि इसी माह में समुद्र मंथन हुआ था, जिसमें से हलाहल विष निकला था। भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए इस विष को अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया, तभी से शिव पर जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई।
मां पार्वती की तपस्या: कहा जाता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण माह में ही कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनसे विवाह किया।
- सृष्टि का संचालन: शास्त्रों के अनुसार, श्रावण माह में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, और इस दौरान सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए यह माह भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
- कांवड़ यात्रा: श्रावण माह में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। लाखों श्रद्धालु विभिन्न पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए शिवलिंगों पर अर्पित करते हैं। इस वर्ष कांवड़ यात्रा भी आज से ही शुरू हो गई है और 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि पर इसका समापन होगा।
- हरियाली और सौभाग्य: यह माह प्रकृति में हरियाली और नवजीवन का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए हरी चूड़ियां पहनती हैं।
प्रमुख मंदिरों में VIP दर्शन स्थगित
श्रावण माह में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए, देश के कई प्रमुख शिव मंदिरों ने VIP दर्शनों को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया है ताकि सभी श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन का अवसर मिल सके।- काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी: बाबा विश्वनाथ धाम में श्रावण माह के दौरान भक्तों की अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। 11 जुलाई से 9 अगस्त तक पूरे श्रावण माह के लिए VIP दर्शन पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। अब कोई भी भक्त विशेष प्रवेश (VIP एंट्री) से मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएगा। सभी श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से ही दर्शन करना होगा। भक्तों को ढाई से तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ सकता है और 5-6 घंटे तक का इंतजार भी करना पड़ सकता है। हालांकि, वृद्ध, अशक्त, दिव्यांगजन और बच्चों के लिए निशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
- बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर (झारखंड): देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में भी राजकीय श्रावणी मेला 10 जुलाई से शुरू हो गया है। यहां भी VIP दर्शन और स्पर्श पूजा इस बार बंद रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अरघा के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था की गई है। यहां 50 लाख से अधिक कांवड़ियों के आने की संभावना है।
- अन्य मंदिर: हालांकि, अभी तक अन्य सभी प्रमुख मंदिरों से VIP दर्शन बंद होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भीड़ प्रबंधन के लिए कई मंदिरों में इसी तरह के कदम उठाए जाने की उम्मीद है। सोमनाथ मंदिर में भी कुछ विशेष पूजाएं ऑनलाइन बुकिंग के साथ फिर से शुरू की जा रही हैं।
श्रावण माह शिव भक्तों के लिए आस्था, तपस्या और भक्ति का महापर्व है। मंदिरों द्वारा की गई इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान शिव के दर्शन कर सकें और इस पवित्र माह का पूर्ण लाभ उठा सकें।

