भोपाल के ऐशबाग इलाके में बने 90 डिग्री के रेल ओवरब्रिज (ROB) को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पुल के डिजाइन को लेकर रेलवे के एक इंजीनियर ने एक साल पहले ही पीडब्ल्यूडी को चेतावनी दी थी। इंजीनियर ने साफ शब्दों में कहा था कि यह डिजाइन न सिर्फ जनता की आलोचना का कारण बनेगा, बल्कि इंजीनियरों की छवि को भी नुकसान पहुंचाएगा।
4 अप्रैल 2024 को भारतीय रेलवे के पर्यवेक्षकों की एक टीम ने इस पुल का निरीक्षण किया था। उस समय रेलवे अपने हिस्से का काम कर रहा था, जबकि पीडब्ल्यूडी ब्रिज के अप्रोच वाले हिस्से पर काम कर रहा था। निरीक्षण के दौरान पश्चिम मध्य रेलवे के डिप्टी सिविल इंजीनियर सुधांशु नागायच ने पीडब्ल्यूडी के ब्रिज डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को एक चिट्ठी लिखकर अपने संदेह जाहिर किए थे।
चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि बरखेड़ी की तरफ ब्रिज और उसके अप्रोच का कनेक्शन सही नहीं लग रहा है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाए जा रहे हिस्से लगभग 90 डिग्री के कोण पर मिल रहे हैं, जो न तो व्यावहारिक है और न ही सड़क पर चलने वालों के लिए सुरक्षित। इंजीनियर ने चेताया था कि इससे जनता नाराज होगी और पुल के डिजाइन की आलोचना करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे इंजीनियरों की छवि को भी नुकसान पहुंचेगा।
अब जब यह पुल पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है और 18 करोड़ रुपये की लागत से 648 मीटर लंबा यह ओवरब्रिज लोगों के सामने आया है, तो इसके 90 डिग्री के मोड़ को लेकर भारी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर मीम्स बन रहे हैं और आमजन में नाराजगी दिख रही है।
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत में सीएम ने माना कि पुल के निर्माण में गलती हुई है। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों को दुरुस्त किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह फॉल्ट ठीक नहीं होता, तब तक आरओबी का लोकार्पण नहीं किया जाएगा।
इस विवाद के बीच पीडब्ल्यूडी और रेलवे एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि रेलवे ने समन्वय की कमी दिखाई और उन्हें समय रहते नया डिजाइन लाने को नहीं कहा। वहीं रेलवे का दावा है कि उन्होंने पहले ही पीडब्ल्यूडी को खामियों से आगाह कर दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अपना हिस्सा बना दिया।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस विवाद का समाधान कैसे निकालती है और इस तकनीकी चूक के जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

