बस्ती जिले के मूल निवासी व सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर इंजीनियर मंजू आशीष बुद्धघोष ने अपनी अंग्रेज़ी पुस्तक “THE CHARIOTEER” के माध्यम से साहित्य जगत में एक नई मिसाल कायम की है। यह पुस्तक समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, छुआछूत, जाति-धर्म जैसी कुरीतियों को समाप्त करने और मानवता के मूल्यों को स्थापित करने का संदेश देती है। प्रेम, वैराग्य, मित्रता, मानवता और अद्वैत जैसे भावों को इसमें खूबसूरती से समेटा गया है।
“THE CHARIOTEER” दरअसल उनकी लोकप्रिय हिंदी पुस्तक “सारथी” का अंग्रेज़ी संस्करण है। इस संस्करण को लिखने की प्रेरणा उन्हें बेंगलुरु के उनके सहयोगी राहुल कृष्णन से मिली, जिन्होंने हिंदी न जानने के कारण इस कहानी को अंग्रेज़ी में लिखने का सुझाव दिया था, ताकि यह संदेश अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँच सके। पुस्तक का प्रकाशन 10 जून 2025 को नोशन प्रेस द्वारा किया गया है।
बुद्धघोष के परिवार में साहित्यिक विरासत की गहरी जड़ें हैं। उनके पिता डॉ. आशीष कुमार गौतम को लेखन के क्षेत्र में 50 से अधिक राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। दादा श्री बाबूराम गौतम की कहानियाँ समाज में व्याप्त बुराइयों पर करारा प्रहार करती रही हैं। बुद्धघोष को अपने चाचा अज्ञेय जी, अजय जी व अन्य परिजनों से भी लेखन की प्रेरणा मिली।
मंजू आशीष बुद्धघोष न केवल उपन्यासकार हैं, बल्कि शॉर्टफिल्म लेखन में भी खास पहचान बना रहे हैं। उन्होंने अब तक करीब आधा दर्जन शॉर्टफिल्मों की कहानियाँ लिखी हैं, जिनमें से कुछ यूट्यूब पर उपलब्ध हैं और कुछ जल्द ही रिलीज़ होने वाली हैं। उनके लेखन की विविधता और विषयों की गहराई उन्हें युवा रचनाकारों में अलग स्थान दिलाती है।
बुद्धघोष का कथन: “जो बातें हम मुँह से नहीं कह सकते, उन्हें हमारी कलम और भी बुलंद आवाज़ में कहती है।” जो उनकी रचनात्मकता की गहराई को बखूबी दर्शाता है। यह वाक्य इस बात का प्रमाण है कि बुद्धघोष अपनी लेखनी को एक सशक्त माध्यम मानते हैं, जिसके ज़रिए वे समाज की उन जटिल और संवेदनशील बातों को भी व्यक्त कर पाते हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग खुलकर नहीं कह पाते। बुद्धघोष की यह सोच हिंदी साहित्य के महान कवियों रहीम और कबीर की परंपरा से भी मेल खाती है, जिन्होंने भी अपने दोहों और रचनाओं के ज़रिए समाज की गूढ़ बातों को सरल शब्दों में सामने रखा था। जैसे रहीम कहते हैं—”बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय।।”—वैसे ही बुद्धघोष भी मानते हैं कि जब मुँह से कहना कठिन हो, तब कलम के ज़रिए सच्चाई को सामने लाना चाहिए।
उनकी यह रचनात्मकता न सिर्फ साहित्य में, बल्कि शॉर्टफिल्म लेखन में भी झलकती है, जहाँ वे समाज के विभिन्न पहलुओं को अपने शब्दों के माध्यम से जीवंत कर देते हैं। इस तरह, बुद्धघोष की लेखनी उनकी संवेदनशीलता, साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है—वह कलम जो चुप्पी को भी आवाज़ देती है।
पुस्तक के प्रकाशन पर पूर्व मंत्री कल्पनाथ बाबूजी, शालिनी सिंह (संयुक्त निर्देशक, एन. आई. सी.), चंद्रप्रकाश जी, अनु साधना गौतम, प्रेम कुमार, डॉ. वी. के. वर्मा, इंजीनियर एम. ए. बुद्धयश, शिवराम कनौजिया, इंजीनियर कृष्ण कुमार, इंजीनियर जयराम प्रसाद, प्रेमसागर, मंजू गौतम, सरोज, कनकलता, अंजलि, इं निधि ,ज्योति समेत कई गणमान्य लोगों ने हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।
“THE CHARIOTEER” न केवल प्रेरणादायक कथा है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और मानवीय मूल्यों को स्थापित करने का सशक्त संदेश भी देती है।

