बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को तगड़ा झटका देते हुए देश के चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया है। इस कदम के चलते अब अवामी लीग आगामी आम चुनावों में हिस्सा नहीं ले पाएगी। यह निर्णय अंतरिम सरकार द्वारा अवामी लीग की सभी राजनीतिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के बाद आया है। वर्तमान में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार देश की सत्ता संभाल रही है।
राष्ट्र सुरक्षा और युद्ध अपराध जांच बनी मुख्य वजह
सरकार ने अवामी लीग की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के पीछे जो तर्क दिए हैं, उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत को लेकर जारी युद्ध अपराधों की जांच प्रमुख कारण हैं।
चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने सोमवार रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि “गृह मंत्रालय द्वारा अवामी लीग और उससे संबद्ध संगठनों की सभी गतिविधियों पर रोक लगाए जाने के बाद, चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण निलंबित करने का फैसला किया है।” (रायटर्स रिपोर्ट के अनुसार)
दो दशक पुरानी सत्ता से बाहर
लगभग दो दशकों से बांग्लादेश की सत्ता में रही अवामी लीग अब तब तक किसी भी आगामी चुनाव में भाग नहीं ले सकेगी, जब तक कि उस पर लगा प्रतिबंध हटा नहीं लिया जाता और चुनाव आयोग उसका पंजीकरण फिर से बहाल नहीं करता।
कठोर निर्देश जारी
चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि अवामी लीग और उसके सहयोगी संगठनों को अब किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों जैसे कि प्रकाशन, मीडिया में उपस्थिति, सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्रचार, जुलूस, रैली या सम्मेलन से दूर रहना होगा। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल अपनी कार्यवाही पूरी नहीं कर लेता।
भारत में शरण, जनता का आक्रोश
2024 में ऐतिहासिक चौथी बार प्रधानमंत्री बनीं शेख हसीना को उसी साल देशव्यापी जन आक्रोश और हिंसक प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें अगस्त 2024 में देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद अंतरिम सरकार ने देश की कमान संभाली।
उल्लेखनीय है कि 2024 के चुनावों में मुख्य विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था, क्योंकि उनके कई शीर्ष नेता या तो जेल में थे या फिर निर्वासन में। स्थिति अब पूरी तरह अंतरिम सरकार और चुनाव आयोग के हाथ में है, और देश में एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

