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विनय शंकर तिवारी की गिरफ्तारी: 750 करोड़ के बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई

सपा नेता और पूर्व विधायक पर मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी का आरोप, कोर्ट ने भेजा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बीते 7 अप्रैल को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उनके लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उनके रिश्तेदार और व्यवसाय से से जुड़े अजीत पांडेय की गिरफ्तारी महाराज गंज जिले से किया गया।दोनों को मंगलवार को विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।
बताया जाता है कि 754 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने एक दिन पूर्व लखनऊ ,दिल्ली,मुंबई आदि 10 ठिकानों पर एक साथ छापे मारी की गई थी। ईडी की माने तो तिवारी परिवार से जुड़ी गंगोत्री इंटर प्राइज़ेज लिमिटेड ने बैंकों से करीब 1130 करोड़ की क्रेडिट सुविधा हासिल किया था जिसके दुरुपयोग के कारण बैंको को लगभग 755 करोड़ का नुकसान हुआ । छापे मारी के बाद जांच एजेंसी ने गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड के कार्यालय को सील कर दिया, जो इस मामले के केंद्र में है।
गोरखपुर के दिग्गज ब्राह्मण नेता और पूर्व मंत्री स्वर्गीय हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं। ED का दावा है कि तिवारी ने बार-बार पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर सहयोग नहीं किया, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी जरूरी हो गई। इस मामले की शुरुआत अक्टूबर 2020 में CBI द्वारा दर्ज एक FIR से हुई थी, जिसमें तिवारी, उनकी पत्नी रीता तिवारी और अजीत पांडेय को नामजद किया गया था। ईडी का आरोप है पहले भी नवंबर 2023 में तिवारी से जुड़ी 72.08 करोड़ रुपये की 27 अचल संपत्तियों को कुर्क किया था। ये संपत्तियां गंगोत्री इंटरप्राइजेज, रॉयल एम्पायर मार्केटिंग लिमिटेड और अन्य फर्मों के नाम पर थीं। तिवारी 2017 में बसपा के टिकट पर चिल्लूपार विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में वह सपा में शामिल हो गए और 2022 का चुनाव हार गए।
विनय शंकर तिवारी के भाई पूर्व सांसद कुशल तिवारी ने ईडी की पूरी कार्यवाही और गिरफ्तारी को अवैधानिक बताते हुए राजनैतिक रंजिश के तहत संस्थाओं के दुरुपयोग का मामला बताया।पूर्व सांसद ने कहा कि प्रकरण न्यायालय में चल रहा है जिसके समक्ष सारे अभिलेख तथा विवरण मौजूद है ऐसे में ईडी की कार्यवाही तर्कसंगत और कानूनी नहीं है।केंद्र की सरकार का संस्थाओं के दुरुपयोग कर विपक्ष की राजनीति करने वालो के मनोबल को तोड़ने का प्रयास का इतिहास रहा है,परंतु इस बार उनका प्रयास विफल होगा।
विनय शंकर तिवारी की गिरफ्तारी पर सपा कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। कुछ ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया, वहीं ED का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और सबूतों पर आधारित है। तिवारी के वकील ने कहा कि वे कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे और अपने मुवक्किल को निर्दोष साबित करने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल, यह मामला उत्तर प्रदेश की सियासत में विशेष कर पूर्वांचल में हलचल मचाए हुए है। जातीय समीकरणों में बड़े बदलाव का कारक भी बन सकता है जिसका प्रभाव 2027 में देखने को मिल सकता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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