बस्ती, 22 जनवरी: संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के देशव्यापी आवाहन पर बस्ती जिले के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सांसद राम प्रसाद चौधरी से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री को संबोधित एक पत्र सौंपा। इस पत्र के माध्यम से स्थगित किए गए तीन कृषि कानूनों को अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने के प्रयासों का विरोध जताया गया।
किसान संगठनों की आपत्तियां
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता दीवान चंद्र चौधरी ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित एनपीएफएम (नेशनल प्रोडक्ट फार्म मार्केट) मसौदे को स्थगित कृषि कानूनों का पुनर्जन्म बताते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह मसौदा किसानों के हितों के खिलाफ है।
जै किसान आंदोलन के नेता सुधाकर शाही ने 9 दिसंबर 2021 को हुए समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किसान संगठनों की राय और सहमति के नया बिजली कानून नहीं लाया जाना था। बावजूद इसके, सरकार स्मार्ट मीटर और बिजली का निजीकरण कर रही है, जो समझौते का उल्लंघन है।
किसान सभा के नेता देव नारायण मौर्य ने सी2 फॉर्मूले के तहत फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग की।

गणतंत्र दिवस पर किसान रैली
एसकेएम बस्ती के सह संयोजक कामरेड केके तिवारी ने घोषणा की कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर और वाहन रैली निकालेंगे। यह रैली किसानों की एकजुटता का प्रतीक होगी और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज करेगी।
प्रमुख लोग रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में किसान संगठनों के नेता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें केके तिवारी, दीवान चंद्र चौधरी, सुधाकर शाही, नरसिंह भारद्वाज, गौरी शंकर चौधरी, सत्यराम, राम दयाल, मुन्नी देवी, त्रिवेणी चौधरी, शिव चरण निषाद, राम महीपत चौधरी, प्रेम चंद्र पांडे, देव नारायण मौर्य, राम जी, प्रकाश चौधरी, शकुंतला, मोहित, रामू जायसवाल, दिवाकर, राम शंकर और राम भजन चौधरी समेत दर्जनों किसान नेता शामिल रहे।

किसानों का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार द्वारा लिए जा रहे किसी भी किसान विरोधी कदम का डटकर विरोध किया जाएगा।
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