एजेंसी, दिल्ली: आरएसएसपी (रिफॉर्म एंड सोशलिस्ट पार्टी) के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में संसद भवन के गेट के सामने कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे “ओछी हरकत” करार दिया और कहा कि कांग्रेस नेताओं ने इस प्रकार के कदम से न केवल अपनी साख को गिराने का काम किया, बल्कि देश की संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई।
प्रदर्शन को बताया संसद की परंपराओं का उल्लंघन
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस प्रदर्शन को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कदम संसद की गरिमा और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जहां राष्ट्र के सबसे अहम मुद्दों पर बहस और समाधान की प्रक्रिया होती है। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने इसे सस्ती राजनीति का अखाड़ा बना दिया है।”
मौर्य ने यह भी कहा कि संसद भवन के गेट पर धरना देकर विपक्ष के सांसदों को सदन में प्रवेश करने से रोकने का जो दुस्साहस किया गया, वह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उनका मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल राजनीतिक हथकंडा था, जिसका उद्देश्य संसद की कार्यवाही को बाधित करना और ध्यान भटकाना था।
कांग्रेस पर “पाप छिपाने” का आरोप
कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए मौर्य ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन का असली मकसद कांग्रेस के “पापों पर पर्दा डालना” था। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से ऐसे ही नकारात्मक हथकंडों का सहारा लिया है। जब उनके पास अपनी विफलताओं का जवाब नहीं होता, तो वे इस तरह की हरकतें करते हैं।”
राहुल गांधी और प्रदर्शन की हकीकत
स्वामी प्रसाद मौर्य ने विशेष रूप से राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि वे इस प्रदर्शन के मुख्य नेता थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने किसी को शारीरिक रूप से धक्का नहीं दिया, जैसा कि कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा था। मौर्य ने इसे “साजिश” करार दिया और कहा कि इस तरह की बातें जनता को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस को यह समझना होगा कि इस तरह के आक्रामक रवैये और निराधार आरोपों से उनकी छवि और खराब होगी। इससे उनकी राजनीतिक साख नहीं बढ़ेगी, बल्कि और गिरावट आएगी।”
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करने का आह्वान
स्वामी प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को नकारात्मक राजनीति से बचने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसद का मंच सबसे उपयुक्त जगह है, जहां मुद्दों को उठाया जा सकता है और उनके समाधान की दिशा में काम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “संसद के अंदर बहस और चर्चा के जरिए ही विवादों का हल निकाला जा सकता है। सड़कों पर प्रदर्शन और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने से कोई लाभ नहीं होगा। यह कदम न केवल विपक्ष के लिए बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक है।”
सरकार और संसद की कार्यवाही पर पड़ने वाले प्रभाव
मौर्य ने यह भी कहा कि विपक्ष के इस तरह के प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल सरकार की कार्यप्रणाली को बाधित करना और जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाना है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे देश में गलत संदेश जाता है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि विपक्ष को समझना चाहिए कि संसद में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भूमिका तभी सार्थक होगी जब वे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएंगे और संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान करेंगे।
कांग्रेस को खुद की छवि सुधारने की सलाह
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पार्टी को सलाह दी कि उन्हें अपने राजनीतिक नजरिए में बदलाव लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। ऐसे प्रदर्शन और आक्रामक रुख से केवल उनकी खुद की छवि खराब होती है। जनता को ऐसे कृत्यों से सिर्फ नकारात्मक संदेश मिलता है।”
विपक्ष को लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने की अपील
स्वामी प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करें और सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय संसद के भीतर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब हर पक्ष अपनी बात रखने के लिए संविधान और संसदीय प्रक्रियाओं का सहारा लेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के भीतर हर मुद्दे पर चर्चा और बहस हो सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया शांति और गरिमा के साथ होनी चाहिए। “संसद की गरिमा बनाए रखना हर सांसद की जिम्मेदारी है, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का।”
आगे का रास्ता
मौर्य ने उम्मीद जताई कि आगे आने वाले समय में विपक्ष अपनी रणनीतियों को बदलेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह समझना चाहिए कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि देश के विकास में रचनात्मक भूमिका निभाना भी है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का यह बयान उस समय आया है, जब विपक्ष और सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। संसद भवन के गेट पर हुए इस प्रदर्शन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। मौर्य ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति बचाने की नाकाम कोशिश करार दिया और सदन की गरिमा को बनाए रखने की अपील की।
उनके अनुसार, लोकतंत्र की सच्ची ताकत संसद की कार्यवाही और बहस में निहित है, न कि सड़कों पर किए जाने वाले प्रदर्शनों में। उनका यह बयान विपक्ष के लिए एक कड़ा संदेश है कि उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए और संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।

