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बस्ती जिला अस्पताल में सख्त निर्देशों के बावजूद ‘बाहर से दवा’ का खेल जारी, मरीजों की बढ़ी परेशानी

सख्त निर्देशों के बावजूद बस्ती जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। 'बाहर से दवा न लिखने' के आदेश को दरकिनार करते हुए, अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर कर रहे

बस्ती, 17 दिसंबर।
शासन द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बावजूद बस्ती जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ‘बाहर से दवा न लिखने’ के आदेश को दरकिनार करते हुए, अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जिला अस्पताल की पड़ताल में यह सच्चाई सामने आई, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लंबी कतारें और बाहर से दवा का खेल

दिसंबर की सर्द सुबह में बस्ती जिला अस्पताल में ओपीडी काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मरीज डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद, उन्हें पर्ची पर लिखी गई दवाएं नहीं मिल पा रही थीं। अस्पताल के अंदर मरीजों से बातचीत में खुलासा हुआ कि कुछ जरूरी दवाएं उन्हें अस्पताल से मिल रही थीं, जबकि बाकी दवाओं के लिए उन्हें बाहर के मेडिकल स्टोर पर भेज दिया जा रहा था।

मरीजों का आरोप है कि यदि वे बाहर से दवा खरीदने से इंकार करते हैं, तो डॉक्टर उन्हें डांट देते हैं या फिर इलाज से भी मना कर देते हैं। ऐसे में मरीजों को अपनी मजबूरी से बाहर की दवा खरीदनी पड़ती है, जो कई बार उनकी जेब पर भारी पड़ता है।

अस्पताल के बाहर दलालों का जाल

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। ओपीडी के बाहर दलालों की भीड़ लगी हुई है, जो डॉक्टरों के साथ मिलीभगत करके मरीजों को सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर पर भेजते हैं। जैसे ही कोई मरीज डॉक्टर से दिखाकर बाहर आता है, दलाल उसे सीधे उन्हीं मेडिकल स्टोरों तक ले जाते हैं, जहां से न केवल दलालों को कमीशन मिलता है, बल्कि चिकित्सकों की जेबें भी गर्म होती हैं। इस दौरान कई बार दलाल मरीजों और उनके तीमारदारों से झगड़े तक करने से बाज नहीं आते।

चिकित्सा अधीक्षक का बयान

इस मामले पर जब जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक, डॉ. वीके सोनकर से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “सभी चिकित्सकों को बाहर से दवा न लिखने का सख्त निर्देश दिया गया है। अगर ऐसा हो रहा है तो हम इसकी जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिवारवालों ने प्रशासन से इसकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, तो कैसे दलालों और चिकित्सकों की मिलीभगत से मरीजों का शोषण हो रहा है?

यह मामला बस्ती जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करता है और क्या इन अनियमितताओं पर कोई नियंत्रण पाया जा सकेगा?


बस्ती जिला अस्पताल में बाहर से दवा लिखने और दलालों के जाल के मामले ने शासन और प्रशासन की साख को चुनौती दी है। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रही इस लूट का पर्दाफाश होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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