उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। हाल ही में लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक वेंटिलेटर पर लेटा मरीज इलाज के लिए मिन्नतें करता नजर आया, जबकि डॉक्टर हाथ खड़े किए हुए थे। यह वीडियो स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलता है और सवाल उठाता है कि अगर राजधानी लखनऊ के मेडिकल कॉलेज का यह हाल है, तो दूर-दराज के जिलों में स्थिति क्या होगी?
स्वास्थ्य सुविधाओं की खस्ताहालत
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली कोई नई बात नहीं है। सरकारी अस्पतालों में दवाइयों से लेकर वेंटीलेटर और ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गोरखपुर का ऑक्सीजन कांड और झांसी का अग्निकांड अब भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। इन घटनाओं ने सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की कमियां उजागर की थीं, लेकिन सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए।
अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। कहीं डॉक्टर अनुपस्थित हैं तो कहीं उपकरण। ऐसी व्यवस्था में सरकार के विकास के दावे खोखले साबित होते हैं।
सरकारी तंत्र में कमीशनखोरी का बोलबाला
राज्य में यह धारणा बनती जा रही है कि हर सरकारी विभाग कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों, उपकरणों और यहां तक कि अस्पताल की बेडशीट तक के टेंडर में घोटालों की खबरें आम हो गई हैं। यह हाल सिर्फ स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है। हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है।
सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचने के बजाय बिचौलियों और कमीशनखोरों की जेब में चला जाता है। सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की सुनवाई लगभग न के बराबर है।
सांप्रदायिक और जातीय राजनीति का खेल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे अहम मुद्दे हाशिए पर चले गए हैं। हर चुनाव में सांप्रदायिकता और जातीय समीकरणों को हवा दी जाती है। जनता का ध्यान मूलभूत समस्याओं से भटकाकर ऐसी बहसों में उलझा दिया जाता है, जिनका कोई सार्थक समाधान नहीं निकलता।
एक समुदाय तब तक संतुष्ट रहता है जब तक दूसरे समुदाय को सुविधाएं नहीं मिलतीं, भले ही वह खुद भी उन्हीं दुर्व्यवस्थाओं से जूझ रहा हो। यह मानसिकता इंसानियत को खोने की ओर इशारा करती है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर कब होगा फोकस?
सवाल यह है कि कब शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवता को प्राथमिकता दी जाएगी? कब जनता और जनप्रतिनिधि सांप्रदायिकता और जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देंगे?
सरकार को चाहिए कि वह स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और उपकरणों की कमी को दूर किया जाए। साथ ही, हर विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाए।
जनता को भी अपने अधिकारों के लिए जागरूक होना पड़ेगा। बिना शिक्षा और स्वास्थ्य के किसी भी राज्य का विकास अधूरा है। उत्तर प्रदेश को सच में उत्तम प्रदेश बनाने के लिए अब गंभीर कदम उठाने का वक्त आ चुका है।

