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बस्ती: निजी अस्पताल के लेनदेन विवाद ने पकड़ा तूल, डॉक्टर पर बकाया राशि न देने के आरोप

मंगलवार को कोतवाली थाने में एक हाई-प्रोफाइल विवाद ने जोर पकड़ लिया। मामला निजी अस्पताल के संचालक डॉक्टर डीके गुप्ता और एक कंपनी की प्रतिनिधि डॉक्टर महक के बीच रुपयों के लेनदेन को लेकर हुआ

बस्ती । कोतवाली थाने में एक हाई-प्रोफाइल विवाद ने जोर पकड़ लिया। मामला निजी अस्पताल के संचालक डॉक्टर डीके गुप्ता और एक कंपनी की प्रतिनिधि डॉक्टर महक के बीच रुपयों के लेनदेन को लेकर हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों के लोग कोतवाली पहुंचे और मामला गर्मा गया। वहीं डॉक्टर की पत्नी निधि ने आरोप लगाया कि एक एहसान नाम व्यक्ति ने उनके पति व उन्हें धमकी दी है।

डॉक्टर महक का आरोप: सर्टिफिकेट के बाद भी बकाया भुगतान नहीं
डॉक्टर महक ने कोतवाली पहुंचकर आरोप लगाया कि डॉक्टर डीके गुप्ता और उनकी पत्नी निधि ने उनके द्वारा अस्पताल में कराए गए कार्य का पूरा भुगतान नहीं किया। डॉक्टर महक ने कहा, “काम पूरा हुए 15 दिन बीत चुके हैं और प्रमाण के तौर पर हमारे पास वीडियो और अन्य सबूत मौजूद हैं। बताती हैं कि बाकी के पैसे उन्हें मिल गए हैं, सिर्फ एक लाख 10 हजार रूपए उन्हें नहीं दिए गए हैं। सर्टिफिकेट भी मिल चुका है, फिर भी पैसे देने से मना किया जा रहा है।”

डॉक्टर गुप्ता ने लगाया आरोप

वहीं, डॉक्टर डीके गुप्ता ने अपनी पत्नी निधि के साथ मिलकर आरोप लगाया कि एक व्यक्ति, जिसका नाम एहसान बताया गया है, उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकी दे रहा है। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि 16 नवंबर को एहसान ने उनकी गाड़ी रोककर उन्हें थप्पड़ मारा और गालियां दीं। इसके बाद, 17 नवंबर को भी उन्होंने फोन के जरिए धमकी दी और 18 नवंबर को फिर से आकर बवाल किया।

आरोपी एहसान ने क्या कहा?
जब एहसान से संपर्क किया गया, तो उन्होंने डॉक्टर डीके गुप्ता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “यह सब झूठे आरोप हैं। डॉक्टर ने जानबूझकर पैसे न देने के लिए यह कहानी बनाई है। संस्था की राशि बकाया है, जिसे चुकाने से बचने के लिए वे मेरे खिलाफ दबाव बना रहे हैं।”

पुलिस कर रही है जांच
कोतवाली प्रभारी एसओ अविश्व मोहन राय ने बताया कि दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त हो चुकी है। मामले की जांच की जा रही है, और तथ्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मामला क्यों है अहम?
यह विवाद निजी अस्पतालों में वित्तीय लेनदेन और कार्य प्रक्रियाओं को लेकर प्रशासन और चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ा सबक बन सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। फिलहाल, विवाद ने शहर में चर्चा का विषय बना लिया है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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