मध्य प्रदेश के ग्वालियर में यूपी के श्रम और रोजगार राज्य मंत्री मनोहर लाल (मन्नू) के काफिले पर शुक्रवार रात जानलेवा हमला हुआ। घटना ग्वालियर की जौरासी घाटी में तब हुई जब मंत्री का काफिला जाम में फंसा था। मंत्री के सुरक्षाकर्मी (PSO) सर्वेश सिंह पर बदमाशों ने हमला कर उनका अंगूठा काट दिया और पिस्टल छीनकर फरार हो गए। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और पिस्टल बरामद कर ली है।
कैसे हुआ हमला?
घटना उस समय हुई जब मंत्री का पायलट वाहन आगे निकल गया और फॉलो वाहन जाम में फंसा रहा। मंत्री की गाड़ी के पास एक बाइक सवार बंटी यादव आया और पीएसओ सर्वेश सिंह से बहस करने लगा। मामला बढ़ने पर पीएसओ ने उसे थप्पड़ मार दिया। इससे गुस्साए बंटी ने फोन कर अपने साथियों को बुला लिया।
कुछ ही देर में पांच से छह बदमाश पहुंचे और पीएसओ पर हमला कर दिया। उन्होंने पीएसओ के अंगूठे को काट दिया और पिस्टल लूट ली। बदमाशों ने मंत्री के सहायक राकेश कुमार से भी मारपीट की।

मंत्री के साथ बदसलूकी
मंत्री मनोहर लाल ने बदमाशों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मंत्री के साथ भी बदसलूकी की। PSO ने पिस्टल निकाली तो बदमाशों ने उसे छीनकर फरार हो गए। घटना के बाद मौके पर IG अरविंद सक्सेना, DIG अमित सांघी और SP धर्मवीर सिंह पहुंचे और काफिले को जाम से बाहर निकलवाया।
पुलिस की कार्रवाई
बिलौआ पुलिस ने मामले में 12 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मारपीट, लूटपाट, और शासकीय कार्य में बाधा का केस दर्ज किया। बाद में जांच में चार आरोपियों की पहचान हुई:
- बंटी यादव
- कप्तान यादव
- भूला सिंह
- भूपेंद्र सिंह
चारों आरोपियों को चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया गया, और लूटी गई पिस्टल भी बरामद कर ली गई।
पृष्ठभूमि और विवाद
बताया जा रहा है कि हमलावर स्थानीय खदान कारोबार से जुड़े हैं और उनकी दबंगई इलाके में पहले भी चर्चा में रही है। मंत्री की कार पर हमला और उनके सुरक्षाकर्मी से इस तरह की हरकत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंत्री का बयान
मंत्री मनोहर लाल ने घटना को गंभीर बताया और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा,“हमले से यह साफ है कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई है। मैं मुख्यमंत्री से इस पर चर्चा करूंगा।”
मामले ने खींचा राजनीतिक ध्यान
घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यूपी और एमपी के बीच समन्वय पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि मंत्री के काफिले को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाई।
मंत्री के काफिले पर इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मामले को संभाल लिया, लेकिन यह घटना साफ संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर दबंगों के हौसले कितने बुलंद हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना से क्या सबक लेता है।

