झांसी: महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीयू) में शुक्रवार रात भीषण आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। इस हादसे ने अस्पताल में कोहराम मचा दिया है। वार्ड में भर्ती 47 में से 31 नवजातों को बचा लिया गया है। हादसे के बाद दमकल और सेना ने बचाव अभियान चलाया।
क्या हुआ था उस रात?
शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे नवजात शिशु वार्ड में अचानक चीख-पुकार मच गई। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि वार्ड में अचानक धुआं भरने लगा। शुरुआत में आग का कारण स्पष्ट नहीं था, लेकिन शुरुआती जांच में सिलेंडर ब्लास्ट को आग लगने की वजह बताया जा रहा है। धुएं और आग की वजह से वार्ड में भगदड़ मच गई। लोग अपने नवजातों को गोद में लेकर भागते नजर आए।
बचाव कार्य और दहशत का माहौल
दमकल की गाड़ियों और सेना के सहयोग से आग पर काबू पाया गया। अस्पताल की खिड़कियां तोड़कर बच्चों और अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया। पूरे अस्पताल में धुएं का गुबार था, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आई। 31 बच्चों को बचाया गया, लेकिन 10 मासूमों की जान नहीं बच सकी। परिजन गुस्से में अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री का शोक और जांच के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सीएम ने घटना की जांच के लिए झांसी के कमिश्नर और डीआईजी को 12 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य मौके पर रवाना हो गए हैं।
अस्पताल प्रशासन पर सवाल
परिजन अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें उनके बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि सभी घायलों का दूसरे अस्पताल में इलाज चल रहा है।
आग का कारण
अस्पताल में आग लगने का मुख्य कारण सिलेंडर ब्लास्ट बताया जा रहा है। यह हादसा अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है। अस्पतालों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
झांसी मेडिकल कॉलेज का यह हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह की त्रासदियों से सीख लेकर अस्पताल प्रशासन सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाएगा या फिर ऐसी घटनाएं बार-बार हमारे सामने आएंगी?

