यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) की परीक्षा के लिए हो रहे लगातार छात्रों के आंदोलन ने आखिरकार अपनी मंजिल पा ली। लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुसार आयोग ने अब परीक्षा प्रणाली में बदलाव का ऐलान कर दिया है। यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा अब पहले की तरह एक ही दिन में और एक शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। डीएम और आयोग के सचिव ने स्वयं आकर यह घोषणा की, जिसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद छात्रों की समस्या का हल निकाला गया है।
चार दिन का आंदोलन, छात्रों की जीत
आंदोलन के चौथे दिन सुबह से ही आयोग के कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई थी। दोपहर में जैसे ही आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में पहुंचे, छात्रों को अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी। करीब सवा चार बजे डीएम और सचिव ने छात्रों के बीच जाकर स्पष्ट किया कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा अब एक दिन में आयोजित होगी।

आरओ-एआरओ परीक्षाओं पर भी समिति की तैयारी
केवल पीसीएस परीक्षा ही नहीं, बल्कि आरओ (रिव्यू ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर) की परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। इसके लिए एक समिति बनाई गई है, जो इन परीक्षाओं के बारे में उचित निर्णय लेगी। छात्रों का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे वे अपने भविष्य की तैयारी में अधिक ध्यान दे सकेंगे।
लिखित नोटिस मिलने तक जारी रहेगा धरना
हालांकि, छात्रों ने इस मौखिक घोषणा को अधूरा बताते हुए धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि वे तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे जब तक कि आयोग इसे लिखित में नोटिस के रूप में जारी नहीं करता। छात्रों का यह भी कहना है कि इस फैसले से भविष्य में परीक्षा प्रणाली में स्थिरता बनी रहेगी और उनके करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आंदोलन की बड़ी उपलब्धि: जानें छात्रों की प्रमुख मांगें
- एक दिन में परीक्षा: पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन में और एक शिफ्ट में आयोजित हो।
- आरओ-एआरओ परीक्षाएं स्थगित: इनके लिए एक समिति बनाई गई है जो इनके आयोजन के तरीकों पर विचार करेगी।
- लिखित नोटिस की मांग: छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक आयोग इस फैसले को आधिकारिक रूप से लिखित में नहीं देता।

मुख्यमंत्री की पहल ने किया छात्रों का भरोसा मजबूत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद, छात्रों की मांग पर जो त्वरित कार्रवाई हुई, उससे छात्रों में विश्वास जगा है कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है। यह आंदोलन यूपीपीसीएस परीक्षा में पारदर्शिता और स्थायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस आंदोलन ने न केवल छात्रों की आवाज़ को प्रमुखता दी, बल्कि आयोग को यह अहसास दिलाया कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह निर्णय छात्रों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत और तैयारी को एक स्पष्ट दिशा मिल सकेगी।
लखनऊ: यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) की परीक्षा के लिए हो रहे लगातार छात्रों के आंदोलन ने आखिरकार अपनी मंजिल पा ली। लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुसार आयोग ने अब परीक्षा प्रणाली में बदलाव का ऐलान कर दिया है। यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा अब पहले की तरह एक ही दिन में और एक शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। डीएम और आयोग के सचिव ने स्वयं आकर यह घोषणा की, जिसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद छात्रों की समस्या का हल निकाला गया है।
चार दिन का आंदोलन, छात्रों की जीत
आंदोलन के चौथे दिन सुबह से ही आयोग के कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई थी। दोपहर में जैसे ही आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में पहुंचे, छात्रों को अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी। करीब सवा चार बजे डीएम और सचिव ने छात्रों के बीच जाकर स्पष्ट किया कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा अब एक दिन में आयोजित होगी।
आरओ-एआरओ परीक्षाओं पर भी समिति की तैयारी
केवल पीसीएस परीक्षा ही नहीं, बल्कि आरओ (रिव्यू ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर) की परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। इसके लिए एक समिति बनाई गई है, जो इन परीक्षाओं के बारे में उचित निर्णय लेगी। छात्रों का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे वे अपने भविष्य की तैयारी में अधिक ध्यान दे सकेंगे।
आंदोलन की बड़ी उपलब्धि: जानें छात्रों की प्रमुख मांगें
- एक दिन में परीक्षा: पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन में और एक शिफ्ट में आयोजित हो।
- आरओ-एआरओ परीक्षाएं स्थगित: इनके लिए एक समिति बनाई गई है जो इनके आयोजन के तरीकों पर विचार करेगी।
- लिखित नोटिस की मांग: छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक आयोग इस फैसले को आधिकारिक रूप से लिखित में नहीं देता।
मुख्यमंत्री की पहल ने किया छात्रों का भरोसा मजबूत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद, छात्रों की मांग पर जो त्वरित कार्रवाई हुई, उससे छात्रों में विश्वास जगा है कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है। यह आंदोलन यूपीपीसीएस परीक्षा में पारदर्शिता और स्थायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस आंदोलन ने न केवल छात्रों की आवाज़ को प्रमुखता दी, बल्कि आयोग को यह अहसास दिलाया कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह निर्णय छात्रों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत और तैयारी को एक स्पष्ट दिशा मिल सकेगी।

