मालेगांव ब्लास्ट केस में भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट में लगातार गैरहाजिर रहने और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर पेश न होने के कारण मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ फिर से जमानती वारंट जारी कर दिया है। पिछले एक महीने में अदालत की ओर से यह उनके खिलाफ जारी किया गया दूसरा वारंट है। कोर्ट के जज लोहाटी ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुराने आदेश के बावजूद प्रज्ञा ठाकुर पेश नहीं हुईं, जिससे यह कदम उठाना पड़ा।
स्वास्थ्य कारणों का दिया जा रहा है हवाला
प्रज्ञा ठाकुर के वकील जे पी मिश्रा ने अदालत को बताया कि प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत ठीक नहीं है, और वे भोपाल के एक अस्पताल में इलाज करा रही हैं, जिसके कारण वे अदालत में हाजिर नहीं हो पा रही हैं। कोर्ट में उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें उनके स्वास्थ्य की स्थिति का विवरण दिया गया है। इसके बावजूद, अदालत ने 10,000 रुपये का नया जमानती वारंट जारी करते हुए प्रज्ञा ठाकुर को 2 दिसंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
क्या है मालेगांव ब्लास्ट मामला?
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए इस भीषण ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सात लोगों पर विस्फोट में संलिप्तता का आरोप है। महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया था।
बार-बार गैरहाजिरी से केस में आ रही है देरी
प्रज्ञा ठाकुर की गैरमौजूदगी और बार-बार मेडिकल कारणों का हवाला देने से मामले में देरी हो रही है। अदालत ने इस बार सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि 2 दिसंबर को भी पेश नहीं हुईं, तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

