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इटावा में मिड-डे मील रसोइयों की मांगों पर जुटे सैकड़ों वर्कर,कामरेड हिमी ठाकुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक

बैठक की अध्यक्षता कामरेड हिमी ठाकुर ने की, जबकि प्रमुख सीटू नेता अमर सिंह, अध्यक्ष रामचंद्र, डॉ. सोंपिता सिंह, मान सिंह कुशवाहा, मिड-डे मील महासचिव अनिता और उमा सहित अन्य वर्करों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई

उत्तर प्रदेश के इटावा में आज मिड-डे मील रसोइयों की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों वर्करों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता कामरेड हिमी ठाकुर ने की, जबकि प्रमुख सीटू नेता अमर सिंह, अध्यक्ष रामचंद्र, डॉ. सोंपिता सिंह, मान सिंह कुशवाहा, मिड-डे मील महासचिव अनिता और उमा सहित अन्य वर्करों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

उत्तर प्रदेश में मिड-डे मील की चुनौतियां

उत्तर प्रदेश राज्य के 76 जिलों में लगभग 1.68 लाख स्कूलों में 1 करोड़ 80 लाख से अधिक बच्चे मिड-डे मील के माध्यम से पोषित हो रहे हैं। इस योजना के तहत 2 लाख 25 हजार से अधिक रसोइए प्रदेश भर में कार्यरत हैं। लेकिन ये रसोइये केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अल्प मानदेय पर गुजारा करने को मजबूर हैं। सरकार इन्हें एक दिन का मात्र 66 रुपये मजदूरी के तौर पर देती है, जिसमें से केंद्र 25 रुपये और राज्य 41 रुपये प्रदान करता है। सवाल यह है कि इतनी कम रकम पर ये वर्कर किस तरह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं?

महिलाओं के सशक्तिकरण पर केवल बातें, असल में शोषण

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण की बातें तो करती है, लेकिन हकीकत इससे बहुत दूर है। इन रसोइयों को महीने में केवल 2000 रुपये मानदेय मिलता है और वह भी अनियमित रूप से। कई महीनों तक इनके वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है। वर्करों को पूरे 12 महीने का वेतन देने के बजाय केवल 10 महीनों का भुगतान किया जाता है, जिससे वे लगातार आर्थिक संकट झेलते हैं। न ही इन्हें किसी तरह की छुट्टियां मिलती हैं और न ही प्रसूति अवकाश का कोई प्रावधान है।

स्थायी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की मांग

2013 में दिल्ली में आयोजित 45वें श्रम सम्मेलन में सरकार ने इन वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन आज तक यह केवल कागजों में ही सीमित है। इसके बजाय, हर साल वर्करों के बजट में कटौती की जाती है और इस योजना को बंद करने या निजी हाथों में सौंपने का प्रयास हो रहा है।

रसोइयों की मुख्य मांगे

  1. न्यूनतम वेतन: रसोइयों को उचित और न्यूनतम वेतन का प्रावधान किया जाए।
  2. 12 महीनों का वेतन: केवल 10 महीने नहीं, बल्कि पूरे साल के 12 महीने का वेतन दिया जाए।
  3. नियमित भुगतान: प्रतिमाह 1 से 7 तारीख के बीच नियमित रूप से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  4. स्थायी रोजगार का दर्जा: 45वें श्रम सम्मेलन के अनुसार सभी वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
  5. सामाजिक सुरक्षा लाभ: सभी वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ लागू किया जाए।
  6. निजीकरण पर रोक: मिड-डे मील की योजना में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं होना चाहिए और न ही केंद्रीय किचन की प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
  7. छंटनी पर रोक: वर्करों की छंटनी पर रोक लगाई जाए।

दिल्ली में 3 दिसंबर को प्रदर्शन का ऐलान

फेडरेशन स्तर पर निर्णय लिया गया है कि इन मांगों को लेकर 3 दिसंबर को दिल्ली में एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश से सैकड़ों वर्कर शामिल होंगे। अगर समय रहते इन मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया गया तो नियमित प्रदर्शन जारी रहेगी। वर्करों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

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