उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हरैया थाना क्षेत्र के लबदहिया गांव में 11 हजार वोल्ट का खुला बिजली तार ग्रामीणों के लिए एक बड़ा संकट बना हुआ है। यह तार पूरे गांव के बीचोंबीच और कई घरों की छतों के ऊपर से गुजरता है, जिससे यहां के लोग लगातार जान का जोखिम झेल रहे हैं। कई बार शिकायतें करने के बावजूद बिजली विभाग ने इस गंभीर समस्या को अनसुना कर दिया है, जिससे गांववासियों में रोष है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर रोष
गांव के निवासी बताते हैं कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और बिजली विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाई। हर बार उन्हें आश्वासन दिया गया कि जल्द ही तारों को बदलकर केबल डाली जाएगी, ताकि खतरा टल सके। लेकिन हर बार केवल वादे किए गए और इसके बाद शिकायतें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। इस वजह से गांव के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, खासकर बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है।

हर दिन बना रहता है खतरा
इस 11 हजार वोल्ट के खुले तार के कारण गांव में कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, खुले तारों के संपर्क में आने का खतरा हर समय बना रहता है, जिससे हर उम्र के लोग, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, हर दिन दुर्घटना का सामना करने को मजबूर हैं। ऐसे में ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि इस जानलेवा स्थिति का जिम्मेदार आखिर कौन है? और गांववासियों को इस खतरनाक स्थिति से कब राहत मिलेगी?
अधिकारियों की अनदेखी से बढ़ता तनाव
ग्रामीणों के अनुसार, जब भी वे बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता है। “सही करवा दिया जाएगा, केबल डाल दी जाएगी,” जैसे वादों के साथ मामले को टाल दिया जाता है। परंतु समय बीतता जा रहा है, और खुले तारों की यह समस्या जस की तस बनी हुई है। गांववासी अपनी जान जोखिम में डालकर जीवन यापन करने पर मजबूर हैं।

बारिश के मौसम में संकट और गहराता
बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। गीली परिस्थितियों में हाई-वोल्टेज तारों के संपर्क में आने का खतरा ज्यादा होता है, जिससे गांव में हादसों की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अपने बच्चों और पालतू जानवरों को खुले में छोड़ने से भी डर लगता है। बरसात के समय जब बिजली तारों में करंट ज्यादा तेज होता है, तो गांव के लोग इस संकट से और भी अधिक डरे रहते हैं।
किसकी जिम्मेदारी?
गांव के लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर इस संकट से किसी की जान जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या बिजली विभाग की लापरवाही को नजरअंदाज किया जाएगा, या फिर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर सवाल उठाए जाएंगे? लबदहिया गांव के लोग यह जानना चाहते हैं कि इस खतरनाक स्थिति से उन्हें राहत कब मिलेगी।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
गांव के निवासी न केवल बिजली विभाग बल्कि अपने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी नाराज हैं। उनके अनुसार, स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या के बारे में कई बार अवगत कराया गया, परंतु अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य होता है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करें, लेकिन यहां की स्थिति देख ऐसा लगता है कि उनकी समस्याओं का कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
सरकार और प्रशासन से मांग
लबदहिया गांव के लोगों की मांग है कि इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए। उनका आग्रह है कि सरकार और बिजली विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करें और खुले तारों को बदलकर केबल डाले, ताकि गांववासी सुरक्षित जी सकें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
लबदहिया गांव की यह समस्या बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का एक उदाहरण है। एक ऐसा गांव जहां लोग खुले हाई-वोल्टेज तारों के बीच रहने को मजबूर हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सुरक्षा और जीवन के अधिकारों के प्रति संबंधित अधिकारियों की लापरवाही कैसे लोगों की जान को संकट में डाल सकती है।

