उत्तर प्रदेश के फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी मुजतबा सिद्दीकी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। गंगानगर के डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत ने जानकारी दी कि सपा प्रत्याशी पर आरोप है कि उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वर्ग विशेष के लोगों के प्रति जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया।
बसपा नेता की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के फूलपुर विधानसभा इकाई अध्यक्ष राजकुमार गौतम ने सराय इनायत थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सपा उम्मीदवार पर एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि यह प्राथमिकी रविवार को दर्ज की गई है और सिद्दीकी पर एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सिद्दीकी का बयान: “गलत तरीके से पेश की गई मेरी बात”
विवाद बढ़ने पर सपा नेता मुजतबा सिद्दीकी ने अपनी सफाई में कहा, “मुझे दलित समाज का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। मेरी बातें मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश की गई हैं। मैं जिस दलित समाज के समर्थन पर तीन बार विधायक रह चुका हूं, उनके खिलाफ कुछ कहने का सवाल ही नहीं उठता। फिर भी, यदि अनजाने में कोई बात गलत तरीके से कही गई हो, तो मैं माफी मांगता हूं।” सिद्दीकी ने इस प्राथमिकी को चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इसका मकसद दलित समाज में उनके प्रति गलत भावना पैदा करना है।
सपा और ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में मैदान में सिद्दीकी
गौरतलब है कि मुजतबा सिद्दीकी का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। वह पहले दो बार सोरांव और एक बार प्रतापपुर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। इस बार, समाजवादी पार्टी ने उन्हें ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में उतारा है। इस उपचुनाव पर सभी दलों की निगाहें हैं, और इस विवाद के बाद चुनावी माहौल गरम हो गया है।
विवाद ने बढ़ाया चुनावी सस्पेंस
यह मामला फूलपुर में चल रहे चुनावी माहौल में एक नया मोड़ लेकर आया है। उपचुनाव से पहले इस तरह का मामला सपा के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, बसपा और अन्य दलों ने इस मुद्दे को लेकर सपा पर हमला बोल दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
अब देखना यह है कि आगामी उपचुनाव में इस विवाद का सपा उम्मीदवार पर क्या प्रभाव पड़ता है। सिद्दीकी का यह बयान कि वह दलित समाज के सम्मान के लिए हमेशा खड़े रहे हैं और चुनावी राजनीतिक के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है, क्या उनके पक्ष में सहानुभूति बढ़ा पाएगा या नहीं, यह चुनावी नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।

