भानपुर तहसील के अजगैवा जंगल गांव के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर अनशन शुरू किया है, जो दूसरे दिन भी जारी रहा। ग्राम प्रधान मधुबाला चौधरी के नेतृत्व में हो रहे इस अनशन का मुख्य उद्देश्य चकबंदी प्रक्रिया में फटे हुए दस्तावेजों को उपलब्ध कराना और तहसील कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि ग्राम अजगैवा जंगल तप्पा शिवपुर परगना बस्ती पूरब के जिल्द बंदोबस्त के सीएच 40, 41, और 45 के फटे पन्नों को चकबंदी विभाग को उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों के अनुसार, यह पन्ने महत्वपूर्ण संपत्तियों जैसे ग्राम सभा की संपत्ति, बंजर भूमि, नवीन परती, सड़क, खलिहान, और स्कूल आदि से जुड़े हुए दस्तावेजों के हैं, जो अब गायब हैं।
ग्राम प्रधान मधुबाला चौधरी ने बताया कि जिला बंदोबस्त के परीक्षण में खाता संख्या 958 के बाद पृष्ठ संख्या 1601 से 1652 तक के पन्ने तहसील के कर्मचारियों द्वारा निकाल दिए गए हैं। यह पन्ने न केवल गांव के दस्तावेज हैं, बल्कि चकबंदी प्रक्रिया में एक प्रमुख अड़चन भी बने हुए हैं। बंदोबस्त अधिकारी द्वारा चकबंदी के पत्र में इन फटे पन्नों को उपलब्ध कराकर अभिलेख चकबंदी में भेजने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों की अब तक अवहेलना की गई है।
समाधान की प्रतीक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को रख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया कि लगातार पत्राचार के बावजूद अधिकारियों द्वारा इस मामले को हल्के में लिया गया, जिसके कारण गांव में चकबंदी प्रक्रिया में देरी हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी तहसील कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो अनशन जारी रहेगा।
नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में जांच समिति की मांग
ग्रामीणों की ओर से यह भी मांग उठाई गई है कि नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाए जो इस मामले की जांच कर दोषियों को चिन्हित कर सके। ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए बिना चकबंदी प्रक्रिया के सुचारू रूप से आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।
अगले कदम पर अटल
ग्राम प्रधान मधुबाला चौधरी ने कहा कि उनका यह अनशन न्याय की मांग के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती और चकबंदी प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए जाते, तब तक यह आंदोलन अनवरत चलता रहेगा।

