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बस्ती में मिड-डे मील रसोइयों का प्रदर्शन, निशाने पर केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार

मिड-डे मील रसोइया कर्मचारी यूनियन ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के बहाने स्कूलों को बंद करने और छात्रों, अध्यापकों एवं रसोइयों के अन्यत्र समायोजन के फैसले का विरोध करते हुए ज़ोरदार प्रदर्शन किया

बस्ती, 25 अक्टूबर मिड-डे मील रसोइया कर्मचारी यूनियन ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के बहाने स्कूलों को बंद करने और छात्रों, अध्यापकों एवं रसोइयों के अन्यत्र समायोजन के फैसले का विरोध करते हुए ज़ोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन के मंडलीय कमेटी के नेतृत्व में बस्ती सहित मंडल के तीनों जनपदों में तहसील स्तर पर धरना प्रदर्शन का पहला चरण पूरा किया गया है। अब दूसरे चरण में बस्ती में जिला मंत्री ध्रुवचंद के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा गया।

रसोइयों के लिए सम्मानजनक वेतन और श्रमिक हितों की मांग

प्रांतीय अध्यक्ष कामरेड के.के. तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार रसोइयों को न्यूनतम वेतन सहित अन्य श्रमिक लाभ देने में उदासीनता बरत रही है, जो अनुचित है। उन्होंने चंद्रावती केस में उच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने की मांग की और सरकार पर धीरे-धीरे प्राथमिक शिक्षा के अपने संवैधानिक दायित्व से पीछे हटने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 26 नवंबर को लखनऊ में एमडीएम निदेशक कार्यालय पर महा प्रदर्शन किया जाएगा।

“रसोइयों का मानदेय बढ़ाकर 26,000 रुपये किया जाए”

जिला मंत्री ध्रुवचंद ने कहा कि मिड-डे मील रसोइयों का मानदेय अब 2,000 रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 26,000 रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए। बिना पूर्व सूचना के रसोइयों को हटाए जाने की निंदा करते हुए उन्होंने विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण बंद करने की नीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि स्कूलों को बंद करना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

अनावश्यक ड्यूटी के खिलाफ भी उठी आवाज

यूनियन के सदस्य नवनीत यादव ने रसोइयों को सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक स्कूल में रोके जाने की निंदा की और मांग की कि काम समाप्त होने पर उन्हें घर जाने की अनुमति दी जाए। एमडीएम नेता पंकज प्रसाद गौड़ ने रसोइयों को दुर्घटना की स्थिति में 10 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देने की मांग की, साथ ही रसोइयों को बीमा कवरेज प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रमिक हितों और न्याय के लिए एकजुट महिलाएं

जिला उपाध्यक्ष विशाला, रीना वर्मा और अन्य रसोइयों ने न्यूनतम वेतन, साल में दो वर्दियां, मृतक आश्रित पेंशन और अन्य श्रमिक हित लाभ देने की मांग की। उपस्थित महिलाओं में राधिका, औतारी,सुनीता,कौशल्या,गायत्री, गीता देवी ,संगीता, मालती, सुनीता, , मीरा ,राम रती ,सीता, अकालमती ,आरती ,शान्ति ,पूर्णीमा, अनिता ,दुर्गा वती ,अनार मती, आयसा खातुन उर्मिला देवी ,कलावती देवी, सरोज अयरुनिशा ,कान्ति, परमेश्वर प्रसाद ,खुशबन्निशा ,रीता देवी , कुशलावती सहित दर्जनों रसोइया शामिल रहीं, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रण लिया।

धरने की अध्यक्षता जिला मंत्री ध्रुव चंद ने की और संचालन जगराम गौड़ ने किया। रसोइयों का कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखेंगे, और अगर जरूरत पड़ी तो आगामी आंदोलन और भी व्यापक होगा।

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