मेरठ: जिले के गेझा गांव में पुलिस ने एक बड़ी नकली पेट्रोल-डीजल फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है, जहां रोजाना करोड़ों रुपये की हेराफेरी होती थी। इस घोटाले में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो असली पेट्रोल-डीजल में नकली सॉल्वेंट मिलाकर उसे पेट्रोल पंपों तक पहुंचाते थे। पुलिस के मुताबिक, यह गैंग रोजाना लगभग छह लाख रुपये की अवैध कमाई करता था।
कैसे हुआ खुलासा?
मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि मेरठ-गाजियाबाद बॉर्डर पर स्थित गेझा गांव में एक बड़ी फैक्ट्री में पेट्रोल-डीजल में मिलावट की जा रही है। बुधवार शाम को पुलिस ने गोदाम पर छापा मारा और फैक्ट्री को सील कर दिया। मौके पर पुलिस को देखते ही गोदाम मालिक मनीष और उसके साथी भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
कैसे चल रहा था यह नकली डीजल-पेट्रोल का कारोबार?
फैक्ट्री के अंदर तीन परतों वाले सुरक्षा घेरे में टैंकरों के जरिए असली पेट्रोल-डीजल में हाइड्रोकार्बन सॉल्वेंट और थिनर मिलाया जाता था। मनीष, जो पहले दिल्ली में केमिकल फैक्ट्री में काम करता था, जानता था कि थोड़ी मात्रा में सॉल्वेंट मिलाने से डीजल-पेट्रोल में कोई शक नहीं होगा। इसके बाद उसने तेल सप्लाई करने वाले ड्राइवरों से संपर्क किया और उनके साथ मिलकर यह धंधा शुरू किया।
ड्राइवर गोदाम से टैंकर लेकर जीपीएस निकालकर मनीष के गोदाम में पहुंचते थे, जहां पहले से तैयारी होती थी। टैंकर से लगभग 1000 लीटर असली डीजल-पेट्रोल निकाल लिया जाता था और उतनी ही मात्रा में नकली सॉल्वेंट मिलाकर उसे पेट्रोल पंपों के लिए रवाना कर दिया जाता था।
फैक्ट्री का सेटअप और मिलावट का खेल
गोदाम के अंदर बड़ी-बड़ी टंकियां जमीन के नीचे बनाई गई थीं, जहां सॉल्वेंट और अन्य केमिकल्स स्टोर किए जाते थे। इन टैंकों से मोटरों और पाइपों की मदद से तेल मिक्स किया जाता था और फिर टैंकरों में भरकर सप्लाई किया जाता था। पुलिस ने फैक्ट्री से 12 हजार लीटर पेट्रोल और 23 हजार लीटर मिलावटी तेल बरामद किया है, जिसे जांच के लिए लैब भेजा गया है।
फैक्ट्री मालिक मनीष पहले भी हो चुका है गिरफ्तार
गोदाम का मालिक मनीष इससे पहले भी नकली तेल बनाने के काम में गिरफ्तार हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिलावटी तेल की वजह से नई गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे थे। फिलहाल, पुलिस और पूर्ति विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं और पता लगा रहे हैं कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।
इस भंडाफोड़ से पेट्रोलियम उद्योग में हड़कंप मच गया है, और प्रशासन ने इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश शुरू कर दी है।

