बदायूं: बदायूं मेडिकल कॉलेज में बुखार से पीड़ित 5 वर्षीय बच्ची की मौत का मामला अब सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता और आज़मगढ़ के मौजूदा सांसद धर्मेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। धर्मेंद्र यादव ने बच्ची के परिजनों का विलाप करते हुए एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए हैं।
धर्मेंद्र यादव का आरोप: “सरकार के पास न नियत है, न सोच”
वीडियो पोस्ट के साथ धर्मेंद्र यादव ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “इस तरह की हृदय विदारक् घटना को देखकर मन व्यथित हो जाता है ।। सरकार में बैठे लोग जिनको यह व्यवस्था दुरस्त करनी चाहिये उनके पास इस व्यवस्था को दुरस्त करने की ना नियत ना सोच।” उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बदायूं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेडिकल कॉलेज की सौगात दी थी, लेकिन भाजपा सरकार इसे सुचारू रूप से संचालित करने में विफल रही है।
क्या है पूरा मामला?
बदायूं के मूसाझाग इलाके के थलियानगला गांव के निवासी नाजिम की 5 वर्षीय बेटी शौफिया को बुखार आने पर निजी डॉक्टर ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन शौफिया को बुधवार को बदायूं मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन वहां स्टाफ ने उन्हें इधर-उधर भटकाया। कभी उन्हें एक कमरे में भेजा गया, तो कभी दूसरे विभाग में, लेकिन बच्ची का सही समय पर इलाज नहीं हो सका। परिजनों का आरोप है कि जब वे अपनी बेटी की जान बचाने के लिए दौड़भाग कर रहे थे, तब डॉक्टर क्रिकेट खेल रहे थे।
सीएमएस का बयान: “बच्ची ओपीडी तक नहीं पहुंची थी”
हालांकि, मेडिकल कॉलेज की सीएमएस डॉ. अर्शिया मसूद ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि बच्ची ओपीडी तक पहुंची ही नहीं थी, और ड्यूटी पर बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद थीं। क्रिकेट खेलने वाले डॉक्टरों का उस बच्ची से कोई संबंध नहीं था।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
धर्मेंद्र यादव के इस बयान के बाद यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फिर से सवाल उठ खड़े हुए हैं। मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्टाफ की लापरवाही के आरोपों ने प्रदेश की भाजपा सरकार को घेर लिया है। विपक्ष लगातार सरकार की विफलताओं को उजागर करने में जुटा हुआ है, जबकि सरकार की ओर से मामले की जांच का आश्वासन दिया गया है।
बदायूं के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं, और बच्ची के परिवार में शोक की लहर है। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है, जो प्रदेश में सुधार की सख्त जरूरत की ओर इशारा करती है।

