
बस्ती, 11 सितंबर: एंबुलेंस कांड की पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन शुरू हो चुका है। सीटू और जनौस के संयुक्त नेतृत्व में, न्याय मार्ग स्थित कैंप कार्यालय से एक जुलूस निकाला गया, जिसका समापन जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन के रूप में हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा गया, जिसमें कांड के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में मुख्य रूप से चार मांगे शामिल थीं। सबसे पहले, लखनऊ स्थित उस निजी अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई, जहां पीड़िता के इलाज में लापरवाही बरती गई। इसके साथ ही, सरकारी अस्पतालों में सक्रिय दलाल नेटवर्क को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, क्योंकि इस प्रकार के नेटवर्क स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार और मरीजों के शोषण का कारण बनते हैं।
तीसरी बड़ी मांग उस निजी एंबुलेंस चालक की तत्काल गिरफ्तारी की थी, जिसने पीड़िता के इलाज में बाधा उत्पन्न की। इसके अलावा, एंबुलेंस संचालक के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। चौथी और महत्वपूर्ण मांग बस्ती के छावनी थाने के पुलिसकर्मियों की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई थी, जिन्होंने समय पर सूचना प्राप्त होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने की भी मांग उठाई गई।

प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में कामरेड के के तिवारी, सोनी, नीलू, विशाला, विजय नाथ, जनौस के शिव चरण निषाद, नवनीत यादव, विजय नाथ तिवारी, ध्रुव चंद, जग राम गौड़, कांति देवी, मालती और केसरी आदि शामिल थे। इनके अलावा भी दर्जनों कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक इस प्रदर्शन में शरीक हुए।
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष जोरदार नारेबाजी करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की। पीड़िता के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए सभी ने न्याय सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का संकल्प लिया।
ज्ञात रहे कि 9 सितंबर को सीटू नेता कामरेड के के तिवारी, एडवा और एटक के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता के गांव का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान, प्रतिनिधियों ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का वादा किया। इस मुलाकात में उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ हैं और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर मंच पर आवाज उठाई जाएगी।

इस आंदोलन में महिलाओं की विशेष भूमिका देखने को मिली। एडवा और अन्य महिला संगठनों की सदस्याओं ने बड़े पैमाने पर भागीदारी करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले को किसी भी कीमत पर ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया जाएगा और दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जाएगी।
जनवादी महिला समिति की सदस्यों ने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों और एंबुलेंस सेवाओं के नाम पर मरीजों का शोषण अब असहनीय हो चुका है और इसे जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए। यह प्रदर्शन स्थानीय प्रशासन और सरकार पर दबाव डालने का प्रयास था कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाएं।

