सिद्धार्थनगर जिले की एक महिला के साथ एम्बुलेंस में छेड़छाड़ और उसके पति की मौत से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जो प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यह घटना 29 अगस्त की है जब महिला अपने बीमार पति और भाई के साथ लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित एक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर वापस जा रही थी। इस सफर के दौरान एम्बुलेंस ड्राइवर और अटेंडेंट ने न सिर्फ महिला के साथ अश्लील हरकतें कीं, बल्कि उसके बीमार पति की जान से भी खिलवाड़ किया। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि पहले तो पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में मामला तूल पकड़ने पर जांच शुरू हुई।
घटना का पूरा विवरण
पीड़िता ने बताया कि वह अपने पति और भाई के साथ लखनऊ से सिद्धार्थनगर के लिए प्राइवेट एम्बुलेंस से घर लौट रही थी। एम्बुलेंस चालक ने उसे आगे की सीट पर बैठने का आग्रह किया, और इसी दौरान चालक और उसके साथी ने छेड़छाड़ शुरू कर दी। यह उत्पीड़न करीब 150 किलोमीटर तक चलता रहा, लेकिन महिला की चीख-पुकार को नजरअंदाज किया गया। महिला के भाई ने भी जब यह सब सुना, तो उसने शोर मचाया, लेकिन चालक और अटेंडेंट अपनी हरकतों से बाज नहीं आए।
छावनी क्षेत्र में घटना ने लिया गंभीर मोड़
रात करीब 11:30 बजे बस्ती जिले के छावनी क्षेत्र में एम्बुलेंस रोकी गई। एम्बुलेंस चालक ने महिला के भाई को आगे की सीट पर बैठाकर अंदर से लॉक कर दिया और महिला के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। जब यह प्रयास असफल रहा, तो उसने महिला के पति का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया और उसे कीचड़ में फेंक दिया। इस अमानवीय हरकत के बाद महिला और उसके भाई को गाड़ी से बाहर निकालकर, उनके गहने, नकदी और मोबाइल लूटकर आरोपी फरार हो गए।
पीड़िता की मुश्किलें और पुलिस की लापरवाही
घटना के बाद महिला के भाई ने डायल 112 और 108 पर फोन किया, जिसके बाद कुछ ही देर में पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई। महिला के पति को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उसे गोरखपुर रेफर किया गया, लेकिन गोरखपुर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
जब पीड़िता ने छावनी थाने में शिकायत दर्ज करवाने की कोशिश की, तो पुलिस ने मामले को लखनऊ का बताकर उसे वापस भेज दिया। अंततः महिला ने लखनऊ के गाजीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उसकी एफआईआर दर्ज की गई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले के सुर्खियों में आने के बाद बस्ती के एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बयान जारी किया। उनका कहना था कि 112 के कॉल रिकॉर्ड में किसी भी तरह की ऐसी कोई घटना का उल्लेख नहीं है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मायावती ने घटना की निंदा की
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसे अमानवीय कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिले और न्याय सुनिश्चित हो।
इस घटना ने न केवल प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कानून के पालन में किस तरह की लापरवाही बरती जा रही है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

