शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में कबीर हत्याकांड को लेकर उठे सवाल अब और भी गहराते जा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर तुलसी तिवारी ने न्याय की गुहार लगाते हुए दिल्ली तक पदयात्रा कर रहे हैं। वे शांतिपूर्ण ढंग से केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के आवास के सामने पहुंचकर गेट पर बैठे और उन्हें एक पत्र लिखकर न्याय की मांग की। पत्र में तुलसी तिवारी ने मंत्री जी को याद दिलाया कि कैसे वे हत्याकांड के 44 दिन बाद उनके घर पहुंचे थे और उनके परिवार को सांत्वना देकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था।

लेकिन आज सुबह जिस घटना ने सभी को चौंका दिया, वह थी केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के आवास पर तुलसी तिवारी के साथ हुई मारपीट। यह घटना तब हुई जब तुलसी तिवारी मंत्री जी के घर के सामने शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे। तिवारी का कहना है कि उन्हें जबरदस्ती घसीटा गया, उनकी गाड़ी में बैठाया गया और वहां से भगा दिया गया। इस दौरान उनके पैर और सिर पर चोटें आईं। तिवारी ने इस घटना का बयान जारी किया है और मेडिकल कराने के लिए अस्पताल जा रहे हैं।

तुलसी तिवारी का यह बयान इस बात को उजागर करता है कि पांच साल पहले जिस मामले को लेकर देश की बड़ी-बड़ी हस्तियां उनके घर पहुंचीं थीं, आज वही लोग न्याय की बात आते ही पीछे हटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि जब न्याय की जरूरत होती है, तो सब लोग इसे भूल जाते हैं। तुलसी तिवारी इस घटना के बाद भी न्याय की मांग करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें और भी संघर्ष करना पड़े।
इस घटना ने न केवल तिवारी परिवार को, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस मारपीट की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर क्यों एक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया? क्या न्याय की मांग करना अब अपराध बन गया है? यह घटना समाज के लिए एक गंभीर संदेश देती है कि जब तक सत्ता में बैठे लोग जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगे, तब तक न्याय की उम्मीद करना मुश्किल है।
इस पूरे मामले पर अभी तक केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना के बाद पूरे देश में इसे लेकर बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर तुलसी तिवारी जैसे व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी?
तुलसी तिवारी ने अपनी चोटों के बावजूद न्याय की लड़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को हर मंच पर उठाएंगे और तब तक शांत नहीं बैठेंगे, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता। उनके इस साहसिक कदम ने उन्हें और भी लोगों के समर्थन का पात्र बना दिया है, जो न्याय के लिए उनकी इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।
यह घटना बताती है कि न्याय के लिए लड़ाई आसान नहीं है, लेकिन यह लड़ाई जारी रखनी होगी। पूरे देश की नजरें अब इस मामले पर टिकी हुई हैं कि आगे क्या होता है।

