एटा, 25 अगस्त 2024: उत्तर प्रदेश के एटा जिले के थाना जैथरा क्षेत्र में चोरी की एक घटना को निपटाने के लिए पुलिस ने एक असामान्य और विवादास्पद तरीका अपनाया है। इस मामले में पुलिस ने चोरी के आरोपियों को थाने में बुलाकर गंगाजल की कसम खिलवाई और उन्हें मामले से बरी कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
घटना की शुरुआत 18 मई 2023 को हुई थी, जब थाना जैथरा क्षेत्र के ग्राम बरना निवासी सेना से रिटायर्ड सरोज मिश्रा के घर में चोरी हुई। उसी दिन गांव के ही विजयपाल सिंह के घर से भी चोरी की घटना सामने आई। दोनों पीड़ितों ने थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने दोनों मामलों को एक ही रिपोर्ट में दर्ज कर लिया। सरोज मिश्रा ने दावा किया कि चोरी के दौरान जो सीढ़ी इस्तेमाल की गई थी, वह विजयपाल सिंह की थी, जिससे उन्हें शक हुआ कि चोरी में विजयपाल का हाथ हो सकता है।
इस मामले में सरोज मिश्रा ने स्थानीय पुलिस से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पुलिस की ओर से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, जिससे सरोज मिश्रा संतुष्ट नहीं थीं।
शनिवार को थाना जैथरा में थाना दिवस के दौरान, पुलिस ने सरोज मिश्रा और विजयपाल सिंह को थाने बुलाया। यहां पर विजयपाल सिंह और उनके पुत्र को थाने के मंदिर में गंगाजल हाथ में लेकर कसम खिलवाई गई कि उनका चोरी से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद, पुलिस ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया। इस प्रक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी जता रहे हैं।
पीड़िता सरोज मिश्रा इस कार्रवाई से पूरी तरह असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, “हमने तो किसी तरह की कसम खिलाने की मांग नहीं की थी। किसी ने तो चोरी की होगी, और पुलिस को उसका खुलासा करना चाहिए।” वहीं, सीओ अलीगंज सुधांशु शेखर ने बताया कि चोरी के मामले में मंदिर में कसम खिलाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन वे मामले की जांच कर रहे हैं।
इस मामले में थाना अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि गांव के लोगों द्वारा आपस में कसम खिलाने की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस का इसमें कोई रोल नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर चोरी का आरोपी थाने में आया था, तो पुलिस ने उसे बिना किसी जांच के थाने से जाने कैसे दिया।
यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कानून व्यवस्था के मामले में इस तरह की कार्रवाई कितनी प्रभावी और न्यायपूर्ण हो सकती है। चोरी के वास्तविक आरोपियों का खुलासा होना बाकी है, और पीड़िता को अभी भी न्याय की उम्मीद है।

