बस्ती जिले के कसैला गांव में डायरिया के फैलने से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। 60 वर्षीय लाखूराम पुत्र दुर्बली की डायरिया के कारण मौत हो गई, जबकि 65 वर्षीय खेम चंद्र का इलाज मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में चल रहा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बस्ती सदर विधायक महेन्द्र नाथ यादव ने गांव का दौरा किया और स्वास्थ्य टीम के साथ मिलकर प्रभावित ग्रामीणों को इलाज प्रदान किया।
डायरिया के प्रकोप के कारण गांव में दहशत का माहौल बन गया है। दर्जनों लोग इस संक्रमण से प्रभावित हैं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ को सूचना देने के बाद, विधायक ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजा।

विधायक महेन्द्र नाथ यादव ने पीड़ित ग्रामीणों को व्यक्तिगत रूप से देखा और उनके इलाज की व्यवस्था की। डॉक्टरों ने गांव में स्वास्थ्य जांच की और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने गांव वालों को टंकी का पानी पीने से मना किया और उबालकर पानी पीने की सलाह दी। इसके अलावा, स्वच्छता के महत्व को समझाते हुए लोगों को इस ओर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई।
डॉक्टरों ने ग्रामीणों को इस बात की भी चेतावनी दी कि संक्रमण फैलने की स्थिति में साफ-सफाई और पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो विधायक ने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर मेडिकल कैंप भी लगाया जाएगा।
कसैला गांव में डायरिया का प्रकोप एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है, जिससे निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। विधायक महेन्द्र नाथ यादव की पहल और स्वास्थ्य टीम की सक्रियता से गांव में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन इस समस्या को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए अभी भी काफी प्रयासों की जरूरत है।
विधायक ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य सलाहों का पालन करें और स्वच्छता बनाए रखें। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है कि गांव में नियमित स्वास्थ्य जांच जारी रहे और किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
यह घटना बस्ती जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाती है और इसे सुधारने के लिए एक ठोस योजना की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढ़ना होगा ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्वास्थ्य आपदाओं से बचा जा सके।

