पेरिस ओलंपिक 2024 के पहले छह दिनों के बाद, भारत ने अब तक तीन पदक हासिल किए हैं, और सभी पदक शूटिंग के विभिन्न इवेंट्स में जीते गए हैं। एक अगस्त को पुरुष 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन इवेंट में भारत के स्वप्निल कुसाले ने कांस्य पदक जीता। स्वप्निल इस इवेंट में पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट भी बन गए हैं।
फाइनल के पहले की रात: तनाव और संगीत
स्वप्निल कुसाले ने पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद इंटरव्यू में बताया कि फाइनल मैच के ठीक एक दिन पहले वह ठीक से सो नहीं पाए थे। तनाव को कम करने के लिए उन्होंने गाने सुने और खुद को शांत रखने की कोशिश की। फाइनल मुकाबले के दौरान उन्होंने स्कोरबोर्ड पर अपनी रैंक पर अधिक ध्यान न देकर, अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी हार्टबीट पर ध्यान दिया, जो ऐसे मौके पर बढ़ जाती है, लेकिन मैंने अपने शॉट पर अधिक ध्यान दिया।”
परिवार और मानसिक संतुलन का योगदान
स्वप्निल ने अपने परिवार के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के कारण वह अधिकतर समय घर नहीं जा पाते और पुणे में रहते हैं। स्वप्निल ने भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरणा ली है। उन्होंने कहा, “मैं जब भी धोनी को मैच खेलते हुए देखता हूं, तो वह किसी भी हालात में खुद को शांत रखते हैं, और मैंने भी खुद को उसी तरह से रखने का प्रयास किया। इस पदक को जीतने के बाद जो सीखा, वह आगे आने वाले टूर्नामेंट्स में जरूर काम आएगा।”
कोच मनोज कुमार की भूमिका
स्वप्निल के कोच मनोज कुमार ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि स्वप्निल की तकनीक पर काफी काम किया गया, खासकर स्टैंडिंग पोजीशन में, जिसमें वह पहले वीक थे। कोच मनोज कुमार ने कहा, “हमने स्वप्निल की तकनीक पर काफी मेहनत की, और परिणाम आप सभी के सामने हैं।”
स्वप्निल कुसाले की इस सफलता ने पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत को गर्व महसूस कराया है। उनकी कड़ी मेहनत, मानसिक संतुलन और परिवार के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वप्निल आने वाले टूर्नामेंट्स में अपने प्रदर्शन को कैसे और बेहतर बनाते हैं।

