केरल के वायनाड जिले के मुंडक्कई जंक्शन और चूरलमाला में बुधवार सुबह हर ओर तबाही का मंजर दिखाई दिया। हाल ही में हुए भूस्खलन ने इन क्षेत्रों को भुतहा शहरों में बदल दिया है। जमींदोज इमारतें, कीचड़ से पटे बड़े-बड़े गड्ढे और दरकी जमीन, इन सब ने मिलकर इन स्थानों की पहचान को ही बदल कर रख दिया है।
चूरलमाला, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य और खूबसूरत झरनों के लिए प्रसिद्ध था, अब केवल तबाही की कहानी कह रहा है। सूचिपारा झरना, वेल्लोलिप्पारा और सीता झील जैसे रमणीय स्थान, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थे, अब मलबे और पत्थरों से ढके हुए हैं।

तबाही के बीच तलाशते लोग
भूस्खलन के कारण यहां के निवासियों की जिंदगी तहस-नहस हो गई है। मुंडक्कई जंक्शन में अपने प्रियजनों को खोजते हुए लोग बेहद बदहवास दिखाई दिए। एक बुजुर्ग व्यक्ति ने खुद को संभालते हुए कहा, “हमने सब कुछ खो दिया… सब कुछ… हमारे लिए यहां कुछ भी नहीं बचा।” उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है और अब वे बदहवासों की तरह उनकी तलाश में जुटे हैं।
गैरआधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंडक्कई में लगभग 450-500 घर थे लेकिन अब इस क्षेत्र में केवल 34-49 ही बचे हैं। मंगलवार तड़के मूसलाधार बारिश के कारण हुए भीषण भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा के सुरम्य गांवों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में अब तक 158 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्योंकि अभी भी अनेक लोग मलबे में दबे हुए हैं।
राहत और बचाव कार्यों में जुटे स्वयंसेवक
वायनाड के मेप्पाडी के एक सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र राहत शिविरों में रहकर भूस्खलन से बचे लोगों को भोजन और राहत सामग्री प्रदान करने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं। स्कूल के शिक्षक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनका समर्थन कर रहे हैं। कई विद्यार्थी NSS (राष्ट्रीय सेवा योजना) और NCC (राष्ट्रीय कैडेट कोर) कार्यक्रमों का हिस्सा हैं।
एक छात्र स्वयंसेवक, अल्द्रिया, ने बताया, “यहां रहने वाले लोग हमारे मित्र और उनके परिवार हैं। हम इस घटना से बहुत दुखी हैं, लेकिन मुझे मदद करके खुशी होगी।” एक अन्य छात्र अनंतमेघ ने कहा, “यहां केवल एनएसएस और एनसीसी ही नहीं बल्कि स्कूल के अन्य छात्र भी स्वयंसेवा में जुटे हैं।”

भविष्य की ओर एक नई उम्मीद
मुंडक्कई और चूरलमाला में भूस्खलन से हुई तबाही के बीच राहत और बचाव कार्य जारी है। लोगों के बीच उम्मीद की किरण अब भी बाकी है और वे इस संकट से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। छात्रों और स्वयंसेवकों के प्रयासों ने इस कठिन समय में लोगों के दिलों में नई उम्मीदें जगा दी हैं।

