बस्ती जिले के महिला अस्पताल में आधी रात को उस समय हड़कंप मच गया जब वार्ड में भर्ती 100 से अधिक महिलाओं की हालत अचानक खराब होने लगी। रात के करीब 11 बजे एक नर्स ने सभी प्रसूताओं को एक ही प्रकार का इंजेक्शन लगाया, जिसके कुछ ही मिनटों बाद मरीजों ने बीपी लो, सांस फूलने और तेज बुखार जैसे लक्षणों की शिकायत की।
मरीजों और परिजनों का आरोप
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि नर्स द्वारा लगाए गए इंजेक्शन के कारण ही उनकी हालत बिगड़ी। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद ही मरीजों में अलग-अलग तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। कुछ का बीपी लो हो गया, कुछ को सांस लेने में कठिनाई होने लगी और कुछ को तेज बुखार हो गया।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही, जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम रवीश कुमार गुप्ता खुद महिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि सभी मरीजों को एक ही प्रकार का इंजेक्शन लगाया गया था, जिसके बाद उनकी हालत खराब हो गई। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि इंजेक्शन एक्सपायर नहीं थे और उन्हें चेक करने के बाद ही लगाया गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
डीएम रवीश कुमार गुप्ता ने कहा कि एक ही साथ इतने सारे मरीजों की हालत बिगड़ना हैरान करने वाली बात है और इसकी जांच शुरू हो गई है। फिलहाल, सभी मरीज खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घटना के पीछे असल कारण क्या है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल
मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि सरकारी अस्पताल होने के कारण महिला अस्पताल में कोई भी अधिक ध्यान नहीं देता है। जब मरीजों की हालत गंभीर होने लगी तो वहां पर कोई भी डॉक्टर या नर्स मौजूद नहीं थे। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह देखा जाना बाकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं। प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के बीच, सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कैसे इतनी बड़ी लापरवाही हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाएगा।

