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यूपी में योगी सरकार को अपने ही मंत्रियों और विधायकों से विरोध का सामना

एक पत्र वायरल हो रहा है जिसमें केशव मौर्या ने सीएम योगी के विभाग से रिजर्वेशन को लेकर सवाल किए

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन दिनों अपने ही मंत्रियों और विधायकों से विरोध का सामना कर रही है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के बगावती सुर हाल ही में जनता के सामने आए हैं। उनके एक ट्वीट ने दिल्ली बीजेपी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। अब एक पत्र वायरल हो रहा है जिसमें केशव मौर्या ने सीएम योगी के विभाग से रिजर्वेशन को लेकर सवाल किए थे।

केशव मौर्या का पुराना पत्र फिर चर्चा में

यह पत्र बताया जा रहा है कि पुराना है, लेकिन इसने विपक्ष को एक बार फिर मुद्दा दे दिया है। विपक्ष आने वाले मॉनसून सत्र में सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त 2023 को डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने संविदा और आउटसोर्सिंग की भर्तियों में आरक्षण को लेकर सवाल उठाए थे।

संविदा और आउटसोर्सिंग में आरक्षण का सवाल

केशव मौर्या ने अपने पत्र में पूछा था कि संविदा और आउटसोर्सिंग की भर्तियों में कितना आरक्षण दिया गया है। साथ ही उन्होंने सरकारी विभागों में संविदा और आउटसोर्सिंग से हुई भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी थी। उन्होंने 2008 के आदेशों का पालन करने की बात कही थी, जिसमें मायावती सरकार ने संविदा भर्ती में एससी को 21 प्रतिशत और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान बनाया था।

एनडीए सहयोगी अनुप्रिया पटेल का समर्थन

केंद्रीय मंत्री और एनडीए की सहयोगी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने भी इसी मुद्दे पर योगी को पत्र लिखा था। लोकसभा चुनाव में आरक्षण मुद्दे को लेकर ही बीजेपी को यूपी में बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी।

बीजेपी की आंतरिक कलह का कारण

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर यह मुद्दा बीजेपी की आंतरिक कलह का कारण बन सकता है। इस स्थिति में पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है ताकि आगामी चुनावों में इसे दोहराया न जा सके।

वर्तमान समय में योगी सरकार को अपने ही मंत्रियों और विधायकों से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। डिप्टी सीएम केशव मौर्या का यह पत्र और उसमें उठाए गए सवाल आगामी राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि योगी सरकार इस मुद्दे से कैसे निपटती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस प्रकार भुनाता है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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