121 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल
यूपी के हाथरस में मंगलवार को हुए हादसे में अबतक 121 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस दर्दनाक घटना में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह जानबूझकर रची गई साजिश थी? बाबा भोले नाथ कहां फरार हो गए हैं? जानें पूरा सच।
घटना का संदेहास्पद एंगल
हाथरस में मंगलवार को हुई दुर्घटना में अबतक 121 लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति गंभीर है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस हादसे में साजिश का एंगल हो सकता है। सत्संग स्थल पर ‘रंगोली’ बनाई गई थी, जिस पर चलकर बाबा को निकलना था। पंडाल से निकलने के बाद बाबा के भक्तों का हुजूम उनके चरणों की धूल लेने के लिए उमड़ पड़ा। लोग उस रंगोली को बाबा का आशीर्वाद मानकर दंडवत प्रणाम कर रहे थे और रंगोली के बुरादे को अपने साथ ले जाना चाहते थे।
भीड़ का उमड़ना और भगदड़
रंगोली के बुरादे को लेने के लिए हजारों की भीड़ बाबा के चरणों की धूल लेने के लिए दंडवत हुई, और फिर भगदड़ मच गई। किसी को संभलने का मौका नहीं मिला और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। इस दुर्घटना में 121 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हादसे के समय चप्पलें, जूते और बिखरे हुए सामान इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह घटना कितनी भयानक थी।
लापरवाही का बड़ा मामला
एफआईआर के मुताबिक, मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर ने प्रशासन से सत्संग के आयोजन की परमिशन मांगी थी, जिसमें 80 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, बताया जा रहा है कि ढाई लाख से ज्यादा श्रद्धालु वहां पहुंच गए। प्रवचन खत्म होने के बाद सूरजपाल उर्फ भोले बाबा अपनी गाड़ी में बैठकर आयोजन स्थल से बाहर निकल रहे थे, तभी उनकी एक झलक पाने के लिए हजारों श्रद्धालु दौड़ पड़े।
भोले बाबा का अतीत और फरारी
नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा का असली नाम सूरजपाल सिंह है। बाबा कभी पुलिस विभाग में कांस्टेबल था, लेकिन यौन शोषण के आरोप के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था। जेल जाने के बाद उसने नाम और पहचान बदल ली। अनुयायी बाबा को परमात्मा कहते हैं, जबकि उसकी पत्नी को मां जी बुलाते हैं। हादसे के बाद बाबा नारायण साकार हरि अंडरग्राउंड है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

साजिश का खुलासा
SDM की रिपोर्ट में इस घटना के पीछे एक साजिश की बात सामने आई है। आयोजकों ने प्रशासन के नियमों का पालन नहीं किया। भीड़ को कंट्रोल करने का कोई प्लान नहीं था। एफआईआर में इस बात का जिक्र किया गया है कि हादसे के बाद आयोजकों ने सबूत मिटाने की कोशिश की। पास के खेतों में लोगों के छूटे जूते-चप्पल फेंककर सबूत मिटाए गए।
निष्कर्ष
यह घटना बेहद दुखद और हृदय विदारक है। हाथरस की इस दुर्घटना ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि बाबा भोले नाथ के फरार होने से यह संदेह भी पैदा हो गया है कि क्या यह जानबूझकर रची गई साजिश थी। अब देखना यह है कि जांच के बाद इस मामले की सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है।

