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“ऐसी आलोचना हुई थी…”, देश भर में तीन नए कानून लागू होने पर क्या बोलीं SC की वरिष्ठ वकील गीता लूथरा

मामले की सुनवाई पूरी होने के 30 दिन के अंदर फैसला देना होगा। जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के भीतर उसकी कॉपी मुहैया करानी होगी।

देश में 1 जुलाई 2024 से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं। 51 साल पुराने सीआरपीसी की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) ने ले ली है। भारतीय दंड संहिता (IPC) के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और इंडियन एविडेंस एक्ट के बजाय भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने इन नए कानूनों के बारे में अपनी राय व्यक्त की है।

नए कानूनों पर गीता लूथरा की प्रतिक्रिया

गीता लूथरा का कहना है, “मुझे ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का सारांश इन नए कानूनों में शामिल किया गया है। ऐसी आलोचना हुई थी कि हमारे सिस्टम में देरी हो रही है, इसलिए इसे सुलझाने के लिए एक उपाय की जरूरत थी। अब 30 दिन के अंदर फैसला आना चाहिए।”

तीन नए कानूनों की विशेषताएं

नए कानूनों के लागू होने से पहले दर्ज हुए मामलों पर इनका प्रभाव नहीं पड़ेगा। 1 जुलाई 2024 से नए कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है और इन्हीं के अनुसार जांच और ट्रायल पूरा होगा। BNSS में कुल 531 धाराएं हैं, जिनमें से 177 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। 14 धाराओं को हटा दिया गया है, 9 नई धाराएं और 39 उप-धाराएं जोड़ी गई हैं। भारतीय न्याय संहिता में कुल 357 धाराएं हैं, जबकि IPC में 511 धाराएं थीं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कुल 170 धाराएं हैं, जिनमें 6 धाराओं को हटाया गया है, 2 नई धाराएं और 6 उप-धाराएं जोड़ी गई हैं।

डिजिटल साक्ष्य पर जोर

नए कानूनों में ऑडियो-वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर विशेष जोर दिया गया है। फॉरेंसिक जांच को महत्वपूर्ण माना गया है। कोई भी नागरिक कहीं भी जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है और जांच के लिए मामला संबंधित थाने में भेजा जाएगा। अगर जीरो एफआईआर ऐसे अपराध से जुड़ी है, जिसमें तीन से सात साल तक सजा का प्रावधान है, तो फॉरेंसिक टीम से साक्ष्यों की जांच करवानी होगी। अब ई-सूचना से भी एफआईआर दर्ज हो सकेगी। हत्या, लूट या रेप जैसी गंभीर धाराओं में भी ई-एफआईआर हो सकेगी।

नई प्रक्रियाएँ और प्रावधान

एफआईआर के 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर कोर्ट को आरोप तय करने होंगे। मामले की सुनवाई पूरी होने के 30 दिन के अंदर फैसला देना होगा। जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के भीतर उसकी कॉपी मुहैया करानी होगी। पुलिस को हिरासत में लिए गए व्यक्ति के बारे में उसके परिवार को लिखित में सूचित करना होगा और ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से जानकारी देनी होगी।

महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराध

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए BNS में कुल 36 धाराओं में प्रावधान किया गया है। रेप का केस धारा 63 के तहत दर्ज होगा। धारा 64 में अपराधी को अधिकतम आजीवन कारावास और न्यूनतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है। 12 साल से कम उम्र की पीड़िता के साथ रेप पर अपराधी को न्यूनतम 20 साल की सजा, आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।

मॉब लिंचिंग और सामुदायिक सेवा

मॉब लिंचिंग को अपराध के दायरे में लाया गया है और इसके लिए 7 साल की कैद, उम्रकैद या फांसी की सजा का प्रावधान है। छोटे-मोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। आत्महत्या का प्रयास, लोक सेवकों द्वारा अवैध व्यापार, छोटी-मोटी चोरी, सार्वजनिक नशा और मानहानि जैसे मामलों में सामुदायिक सेवा को सजा के तौर पर शामिल किया गया है।

गीता लूथरा ने नए कानूनों के तहत देरी को सुलझाने के उपाय को सराहा है और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के सारांश को इनमें शामिल करने की प्रशंसा की है। नए कानूनों के तहत न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया गया है।

Rishik Dwivedi
Rishik Dwivedi
Founder Member & Sub- Editor of NTF
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