पेपर लीक की घटनाओं पर काबू पाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति के अध्यक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन होंगे। इस समिति में कुल सात सदस्य शामिल होंगे जो परीक्षा की प्रक्रियाओं में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और NTA के स्ट्रक्चर पर काम करेंगे। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
समिति के सदस्य
शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित इस उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और सदस्य इस प्रकार हैं:
- डॉ. के. राधाकृष्णन (अध्यक्ष): पूर्व अध्यक्ष, इसरो और अध्यक्ष, बीओजी, आईआईटी कानपुर
- डॉ. रणदीप गुलेरिया (सदस्य): पूर्व निदेशक, एम्स दिल्ली
- प्रो. बी. जे. राव (सदस्य): कुलपति, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद
- प्रो. राममूर्ति के. (सदस्य): प्रोफेसर एमेरिटस, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी मद्रास
- श्री पंकज बंसल (सदस्य): सह-संस्थापक, पीपल स्ट्रॉन्ग और बोर्ड सदस्य- कर्मयोगी भारत
- प्रो. आदित्य मित्तल (सदस्य): डीन स्टूडेंट अफेयर्स, आईआईटी दिल्ली
- श्री गोविंद जायसवाल (सदस्य): संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार)
समिति के कार्य
इस समिति का मुख्य कार्य पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना और उन्हें लागू करने के लिए सिफारिशें देना है। समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष रूप से ध्यान देगी:
- परीक्षा प्रक्रियाओं में सुधार
- डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार
- NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के ढांचे का मूल्यांकन और उसमें सुधार
पृष्ठभूमि
हाल के वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए कानून की अधिसूचना भी जारी की है और अब एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है जो इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
समिति की रिपोर्ट
समिति को अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर शिक्षा मंत्रालय को सौंपनी होगी, जिसमें पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदमों और सुधारों की सिफारिशें शामिल होंगी।
इस पहल से उम्मीद है कि भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रूप से काबू पाया जा सकेगा और देश की परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।

